बच्चों को अनुशासन स‍िखाने से पहले पेरेंट्स सुधारें अपना व्यवहार

By Tatkaal Khabar / 03-04-2026 10:13:55 am | 149 Views | 0 Comments
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आजकल के भागदौड़ के जीवन में माता पिता स्वेम में हीउलझते चले जा रहे है उनका ध्यान अपने बच्चों में नहीं रहता सिर्फ काम के पीछे भगते रहते है ऐसे परिस्थिति में बच्चे बिगड़ रहे है वो माता पिता का एक भी कहना नहीं मान रहे है आपका बच्चा भी बात-बात में अगर बहस करता है और नियम तोड़ता है, तो उससे कुछ कहने से पहले माता-पिता को अपने व्यवहार पर गौर करना चाह‍िए। क्योंकि बच्चे ज्यादातर अपने पेरेंट्स के व्यवहार से ही सीखते हैं। इसलिए, माता-प‍िता पहले अपने व्यवहार को सुधारें और सही उदाहरण पेश करें, ताकि बच्चे भी अनुशासित और समझदार बन सकें।

बच्‍चों को अनुशास‍ित रखने के ल‍िए अपनाएं ये ट‍िप्‍स 
बच्चों को अच्छे संस्कार देना और उन्हें अनुशासित रखना हर माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती होती है। हालांकि, अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, बच्चे के अच्छे व्यवहार की सराहना करना और उनकी बात ध्यान से सुनना जैसे सरल उपाय उन्हें धीरे-धीरे अनुशासित बनाने में मदद कर सकते हैं। आइए, इन सुझावों के साथ-साथ कुछ अन्य प्रभावी तरीकों को भी जानते हैं।


बच्चे को अनुशासित रखने के लिए माता-पिता को सबसे पहले खुद शांत और संयमित रहकर अपनी बात रखनी चाहिए। इसके बाद बच्चे को समझाना चाहिए कि उसने क्या गलत किया और क्यों यह व्यवहार सही नहीं है। साथ ही, अगर आप चाहते हैं कि बच्चा अनुशास‍ित रहे और सही तरीके से पेश आए, तो सबसे पहले खुद इसका उदाहरण पेश करें, क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार से ही सबसे ज्यादा सीखते हैं।

ल‍िम‍िट्स तय करें
माता-पिता को अपने बच्चों के लिए ऐसे स्पष्ट और व्यावहारिक नियम बनाने चाहिए, जिन्हें बच्चे वास्तव में पालन कर सकें। नियमों को उनकी उम्र के अनुसार और आसान भाषा में समझाना जरूरी है, ताकि बच्चे उन्हें सही तरीके से समझें और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लागू कर सकें।

माता-पिता को यह भी समझना चाहिए कि सीमाएं कठोरता से नहीं, बल्कि निरंतरता से प्रभावी बनती हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि बच्चे के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के लिए कोई नियम बनाया गया है, तो उसे बार-बार बदलना नहीं चाहिए। इससे बच्चे को यह समझ आता है कि नियम मनमाने नहीं, बल्कि जीवन को व्यवस्थित बनाने के लिए होते हैं।

छोटे-छोटे निर्णय लेने दे


 बच्चों को छोटे-छोटे निर्णय लेने की स्वतंत्रता देना इस दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, माता-पिता उन्हें अपने कपड़े चुनने, पढ़ाई का समय तय करने या किसी गतिविधि का चुनाव करने का मौका दें। इससे बच्चे में जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है और वह अनुशास‍ित भी रहते हैं।
फैम‍िली में एक राय होना जरूरी
बच्चे को सही आदतें सिखाने के लिए परिवार के सभी सदस्यों की सोच और तरीका एक जैसा होना बेहद जरूरी है। खासतौर पर संयुक्त परिवार में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि माता-पिता और अन्य बड़े सदस्य एक ही तरह का संदेश दें। अगर एक सदस्य किसी व्यवहार को रोकता है और दूसरा उसी को बढ़ावा देता है, तो बच्चा भ्रमित हो जाता है। इसलिए बच्चे के बेहतर विकास के लिए परिवार के सभी बड़ों के बीच स्पष्ट सहमति और एकमत होना आवश्यक है।


पर‍िणाम के बारे में बताएं
बच्चों को शांत और स्पष्ट शब्दों में समझाएं कि अगर वे सही तरीके से व्यवहार नहीं करेंगे, तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप कह सकते हैं कि अगर वे अपने खिलौने नहीं उठाएंगे, तो उन्हें पूरे दिन के लिए वह खिलौना नहीं मिलेगा। ध्यान रखें कि जो नियम आप बनाएं, उन्हें तुरंत लागू करें और उस पर कायम भी रहें। बीच में नियमों में नरमी बरतकर अपने फैसले से पीछे न हटें, क्योंकि इससे बच्चा समझ सकता है कि उसे नियमों में छूट मिल सकती है।


बच्‍चे की पूरी बात सुनें
बच्चों को कोई भी बात समझाने से पहले उनकी बात ध्यान से सुनना बहुत जरूरी है। समस्या सुलझाने की जल्दी में उनकी बात बीच में न काटें और उन्हें अपनी बात पूरी करने का मौका दें। यह समझने की कोशिश करें कि कहीं उनके व्यवहार के पीछे कोई खास वजह तो नहीं है। कई बार जलन, गुस्सा या उदासी जैसी भावनाओं के कारण बच्चे गलत व्यवहार कर बैठते हैं। ऐसे में उन्हें तुरंत सजा देने के बजाय, शांतिपूर्वक उनसे बात करें और उनकी फील‍िंग्‍स को समझने की कोशिश करें।

अच्‍छे ब‍िहेव‍ियर की सराहना करें
पेरेंट्स ध्यान दें कि बच्चे के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कब उन्होंने अच्छा व्यवहार किया और कब उनका व्यवहार स्वीकार्य नहीं था। इसलिए जब वे ठीक तरह से ब‍िहेव करें, तो उसकी सराहना करें और उनकी सफलता व अच्छे प्रयासों की प्रशंसा जरूर करें।