Varuthini Ekadashi 2026: 10 हजार साल की तपस्या के बराबर फल देता है वरुथिनी एकादशी का व्रत

By Tatkaal Khabar / 12-04-2026 06:32:10 am | 48 Views | 0 Comments
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Varuthini Ekadashi 2026 Ke Upay: हिंदू धर्म में एकादशी की तिथि का खास महत्व होता है। यह दिन भगवान विष्णु की भक्ति और उपवास के लिए समर्पित है। हर महीने दो एकादशी आती हैं, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन पूरे नियम और श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, खुद भगवान श्री कृष्ण ने इस व्रत की महिमा बताई है। उन्होंने कहा है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को 10 हजार सालों तक तपस्या करने जितना फल मिलता है। इतना ही नहीं, यह व्रत रखने से उतना पुण्य मिलता है जितना कन्यादान करने से प्राप्त होता है। इस व्रत के असर से न केवल जीवन में सुख-शांति आती है, बल्कि आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए भी यह दिन बहुत शुभ माना गया है। वरुथिनी एकादशी पर धन और शांति पाने के लिए आप ये सरल उपाय कर सकते हैं। आइए जानें इस वरूथिनी एकदशी 2026 की तिथि और इस दिन के लिए शुभ उपाय।

वरुथिनी एकादशी 2026 की तिथि
वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 और 13 अप्रैल की रात को 01:16 बजे शुरू होगी। इस तिथि का अंत 13 और 14 अप्रैल की आधी रात को 01:08 बजे होगा। उदया तिथि के नियम के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा।

Varuthini Ekadashi 2026 Ke Upay: सुख-समृद्धि के लिए करें खास उपाय
वरुथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करें। विष्णु सहस्रनाम या गोपाल सहस्रनाम का पाठ करें और धन की देवी को प्रसन्न करने के लिए ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जाप जरूर करें।
आर्थिक संकट से मुक्ति के लिए इस दिन पूजा करते समय भगवान विष्णु को ताजे गन्ने के रस से स्नान कराएं। माना जाता है कि इससे पैसों से जुड़ी परेशानियां खत्म होती हैं और धन आने के नए रास्ते खुलते हैं।
तुलसी जी भगवान विष्णु को बेहद प्रिय हैं। एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और तुलसी चालीसा का पाठ करें। इससे घर में सुख और शांति का वास होता है।
सुख-समृद्धि के लिए तुलसी पर लाल या पीला कलावा बांधना शुभ माना जाता है।
इस दिन अनाज या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें, इसे सोने के दान के बराबर पुण्यकारी माना जाता है।