MS Birthday Special: फुटबॉल के गोलकीपर से क्रिकेट के वर्ल्ड चैंपियन कप्तान तक का सफर
MS Dhoni Birthday Special: भारतीय क्रिकेट इतिहास में महेंद्र सिंह धोनी का नाम सिर्फ एक महान कप्तान या विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत के तौर पर दर्ज है जिसने खेल की दिशा बदल दी. 7 जुलाई 1981 को रांची में जन्मे धोनी आज अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस मौके पर उनके करियर की वह कहानी जानना दिलचस्प है, जब एक फैसले ने उनकी जिंदगी बदल दी थी.
फुटबॉल के गोलकीपर से बने क्रिकेट के 'माही'
धोनी का क्रिकेट सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. स्कूल के दिनों में वह फुटबॉल खेलते थे और गोलकीपर की भूमिका निभाते थे. उनके स्कूल के कोच केशव रंजन बनर्जी ने उनकी फुर्ती और खेल कौशल को देखते हुए क्रिकेट टीम में विकेटकीपर के रूप में मौका दिया. यही वह मोड़ था, जहां से भारतीय क्रिकेट को अपना भविष्य का कप्तान मिलने वाला था.
रेलवे की नौकरी और क्रिकेट का जुनून
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर धोनी को रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी मिली. नौकरी के साथ-साथ उन्होंने क्रिकेट के प्रति अपना समर्पण बरकरार रखा. दिन में काम और शाम को मैदान पर अभ्यास, यही उनकी दिनचर्या बन गई. इसी मेहनत ने उन्हें भारत ए टीम और फिर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाया.
जब करियर पर मंडरा रहा था खतरा
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शुरुआत धोनी के लिए आसान नहीं रही. शुरुआती वनडे मैचों में उनका बल्ला खामोश रहा. लगातार चार पारियों में नाकाम रहने के बाद आलोचक उन्हें टीम से बाहर करने की मांग करने लगे थे. ऐसा लग रहा था कि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा.
गांगुली का फैसला बना टर्निंग पॉइंट
ऐसे मुश्किल दौर में तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने धोनी पर भरोसा दिखाया. उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मैच में धोनी को नंबर-3 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा. यह फैसला भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक साबित हुआ. धोनी ने 123 गेंदों पर 148 रन की विस्फोटक पारी खेलकर दुनिया को अपना परिचय दिया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
रिकॉर्ड्स की लंबी फेहरिस्त
धोनी ने भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में कुल 538 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 17,266 रन बनाए. उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 6 और वनडे में 10 शतक दर्ज हैं. हालांकि, आंकड़ों से ज्यादा उनकी पहचान मैच फिनिश करने की क्षमता और दबाव में शांत रहने के लिए बनी.
भारत को दिलाईं तीन आईसीसी ट्रॉफियां
धोनी की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट ने अपने सबसे सुनहरे दौर का अनुभव किया. 2007 में भारत ने पहला टी20 विश्व कप जीता. 2011 में 28 साल बाद वनडे विश्व कप का सपना पूरा हुआ और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी भी भारत के नाम रही. धोनी आज भी दुनिया के इकलौते कप्तान हैं जिन्होंने ICC की तीनों प्रमुख सीमित ओवरों की ट्रॉफियां जीती हैं.
सम्मानों से सजा शानदार करियर
मैदान पर उपलब्धियों के अलावा देश ने भी धोनी के योगदान को सम्मान दिया. उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और राजीव गांधी खेल रत्न जैसे देश के प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया. 15 अगस्त 2020 को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा, लेकिन भारतीय क्रिकेट पर उनकी छाप आज भी कायम है.
एक फैसले से बदली कहानी
अगर सौरव गांगुली उस समय धोनी पर भरोसा नहीं जताते, तो शायद भारतीय क्रिकेट की कहानी कुछ और होती. लेकिन कप्तान के उस फैसले ने एक ऐसे खिलाड़ी को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर करोड़ों भारतीयों को गर्व करने के अनगिनत मौके दिए और भारतीय क्रिकेट का सबसे सफल कप्तान बनकर इतिहास रच दिया.