राजस्थान गौशाला अनुदान घोटाला: जयपुर की दो बड़ी गौशालाओं से होगी 3 करोड़ 62 लाख की वसूली

By Tatkaal Khabar / 22-08-2026 07:03:49 am | 149 Views | 0 Comments
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Rajasthan Gaushala Grant Scam: राजस्थान में गौशालाओं को दिए गए सरकारी अनुदान में सामने आई अनियमितताओं को लेकर पशुपालन विभाग ने अब सख्ती शुरू कर दी है. जयपुर की दो प्रमुख गौशालाओं-श्री पिंजरापोल गौशाला, सांगानेर और गो पुनर्वास केंद्र, हिंगोनिया-से कुल 3 करोड़ 62 लाख 75 हजार 920 रुपए की वसूली की जाएगी. महालेखाकार की लेखापरीक्षा में अनुदान के भुगतान से जुड़ी कई गड़बड़ियां सामने आने के बाद विभाग ने दोनों गौशालाओं को नोटिस जारी किए हैं. मामला केवल इन दो गौशालाओं तक सीमित नहीं है. प्रदेश की 38 गौशालाओं से कुल 57.36 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि की वसूली के आदेश भी जारी किए जा चुके हैं.



कैग जांच में सामने आई अनियमितताएं

महालेखाकार (लेखापरीक्षा-द्वितीय), राजस्थान, जयपुर की टीम ने गौशालाओं को दिए जाने वाले सरकारी अनुदान का परीक्षण किया था. इस जांच में यह देखा गया कि जिन गौवंश के आधार पर सहायता राशि मांगी गई, उनकी संख्या और वास्तव में गौशाला में मौजूद गौवंश की संख्या में अंतर था. कुछ मामलों में ऐसे टैग भी मिले जो दोबारा इस्तेमाल किए गए थे, जबकि कुछ मृत गौवंश के टैग के आधार पर भी भुगतान लिया गया.



जांच में यह भी सामने आया कि कई गौवंश के टैग भारत पशुधन एप पर पंजीकृत नहीं थे. इसके बावजूद उन्हें अनुदान की गणना में शामिल किया गया. इन गड़बड़ियों के बाद अब पशुपालन विभाग ने अतिरिक्त भुगतान की राशि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है.



हिंगोनिया गौशाला को 1.41 करोड़ ज्यादा भुगतान

जयपुर के गो पुनर्वास केंद्र हिंगोनिया में वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान अनुदान भुगतान में अनियमितता सामने आई. जांच के अनुसार, इन दोनों वित्तीय वर्षों में गौशाला को 31.38 करोड़ रुपए का अनुदान मिलना चाहिए था. इसके बजाय 32.79 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया.



इस तरह करीब 1 करोड़ 41 लाख 20 हजार 100 रुपए की अतिरिक्त राशि का भुगतान हुआ. अब विभाग ने यही राशि गौशाला से वापस लेने के निर्देश दिए हैं.



गौवंश की संख्या के सत्यापन पर उठे सवाल

हिंगोनिया गौशाला के मामले में सबसे बड़ा सवाल गौवंश की संख्या के सत्यापन को लेकर सामने आया. आवेदन में बताई गई गौवंश की संख्या और गौशाला में संधारित गौवंश की संख्या में अंतर पाया गया.



अनुदान 120 से 150 दिनों की अवधि के लिए दिया गया था. जांच में यह भी सामने आया कि पूरी अवधि के दौरान कुछ गौवंश जीवित नहीं थे. इसके बावजूद उनकी गणना के आधार पर भुगतान कर दिया गया. जिला स्तरीय कमेटी पर भी वास्तविक गौवंश का सही तरीके से सत्यापन नहीं करने का सवाल उठा है. इसी आधार पर 1.41 करोड़ रुपए की राशि को अनियमित भुगतान माना गया है.



पिंजरापोल गौशाला में टैग दोहराने का मामला

सांगानेर स्थित श्री पिंजरापोल गौशाला में भी वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच अनुदान से जुड़ी कई गड़बड़ियां सामने आईं. जांच के दौरान 54 बड़ी गायों और 39 छोटी गायों यानी कुल 93 गौवंश के टैग दोहराए जाने की बात सामने आई.