झारखंड में 22 परीक्षाओं की नियुक्ति रद्द करने पर हाईकोर्ट की रोक

By Tatkaal Khabar / 21-08-2026 12:30:59 pm | 82 Views | 0 Comments
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राँची, 21 अगस्त 2026 झारखंड में विभिन्न पदों पर नियुक्तियों से जुड़ी 22 परीक्षाओं को एक साथ रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। इस फैसले के खिलाफ दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती की नियुक्तियां रद्द करने के निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने सरकार की कार्रवाई के तरीके और उसके कानूनी आधार पर गंभीर सवाल उठाते हुए जांच की पूरी स्थिति और आगे की कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना नियमित नियुक्तियों को समाप्त नहीं किया जा सकता। फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती के मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार के पास यह बताने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं है कि कौन-कौन से अभ्यर्थी भ्रष्टाचार में शामिल थे। सरकार ने दलील दी कि नागरिकों की शिकायतों के आधार पर सीआईडी ने गहन जांच शुरू की है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। सरकार का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई, जिसके कारण पूरी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने का फैसला लिया गया। हालांकि, अदालत ने इस तर्क के बावजूद सभी नियुक्तियों को तत्काल समाप्त करने के तरीके पर आपत्ति जताई। 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़े मामलों में भी अदालत ने पहली नजर में कहा कि नियमित नियुक्तियों को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए प्रभावित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार की अधिसूचना में ऐसे कदम को उचित ठहराने वाले पर्याप्त तथ्य दिखाई नहीं देते। अदालत ने परीक्षा में गड़बड़ी की संभावना से इनकार नहीं किया, लेकिन यह सवाल जरूर उठाया कि जांच पूरी होने से पहले उन अभ्यर्थियों की नियुक्तियां कैसे रद्द की जा सकती हैं, जिनके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कोई आरोप या भूमिका सामने नहीं आई है। झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता योगेंद्र यादव के अनुसार, अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में ‘बैलेंस ऑफ कन्वीनियंस’ और ‘पब्लिक इंटरेस्ट’ को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को प्रभावी रूप से बिना किसी विधिक प्रक्रिया के सेवा से हटा दिया गया था और ऐसी स्थिति में अंतरिम संरक्षण देना न्यायहित में जरूरी था। हालांकि, इस आदेश को नियुक्तियों को अंतिम रूप से वैध घोषित किए जाने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। याचिकाकर्ताओं को संबंधित आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट के अंतिम फैसले का पालन करना होगा और यदि आगे कोई ऐसा निष्कर्ष सामने आता है, जो कानूनी कार्रवाई की मांग करता है, तो सरकार कानून के मुताबिक कदम उठा सकेगी। अब सबसे बड़ा सवाल दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों की पहचान का है, जिसका जवाब सरकार की जांच रिपोर्ट और 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई से मिलने की उम्मीद है।