रक्षाबंधन पर राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश, रिश्तों से आगे बताया पर्व का महत्व

By Tatkaal Khabar / 28-08-2026 06:42:43 am | 75 Views | 0 Comments
#

नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026 देशभर में शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में विभिन्न स्कूलों और संगठनों के बच्चों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। राष्ट्रपति ने इस त्योहार को केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित न मानते हुए इसके व्यापक सामाजिक और भावनात्मक महत्व पर प्रकाश डाला। राष्ट्रपति मुर्मु ने बच्चों के साथ आयोजित विशेष रक्षाबंधन समारोह की झलकियां भी साझा कीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “रक्षाबंधन का महत्व भाई-बहन के रिश्ते से कहीं बढ़कर है। राखी का पवित्र धागा परिवार के सदस्यों, दोस्तों और यहां तक कि पेड़ों पर भी बांधा जा सकता है, जो प्यार और देखभाल के बंधन का प्रतीक है।" पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बच्चों से पेड़-पौधों की देखभाल करने का आग्रह किया। इससे पहले रक्षाबंधन के अवसर पर राष्ट्रपति ने देशवासियों के नाम एक संदेश भी जारी किया। उन्होंने सभी भारतीयों को इस पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “रक्षा-बंधन की पावन परंपरा, प्राचीन काल से, हमारी उपासना और संस्कृति का अंग रही है। श्रद्धापूर्वक हाथ पर बांधे गए धागे को, रक्षा हेतु पवित्र सूत्र- बंधन, यानी रक्षा-बंधन माना गया है। अनेक श्लोकों और मंत्रों में, ‘रक्षै, मा चल, मा चल’ इन शब्दों में अनुरोध किया जाता है कि ‘हे रक्षा रूपी बंधन, तुम सदैव अचल रहो।'” राष्ट्रपति ने कहा, “समय के साथ, रक्षा-बंधन, बहन की रक्षा के लिए भाई के हाथ पर राखी बांधने के भावपूर्ण सामाजिक पर्व के रूप में लोकप्रिय हुआ। यह पर्व भाई-बहनों, मित्रों तथा परिवार और समाज के विभित्र सदस्यों के बीच आत्मीयता, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति उत्तरदायित्व के भाव को सुदृढ़ करता है।” राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व जीवन के प्रत्येक रिश्ते में विश्वास, संवेदनशीलता और परस्पर सहयोग की अहमियत को याद दिलाता है। उन्होंने देशवासियों से इस पावन अवसर पर समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए संकल्प लेने की अपील की और कहा कि इसी जिम्मेदारी और एकजुटता की भावना के साथ विकसित भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।