मनरेगा पर ‘बुलडोजर’ के आरोप बेबुनियाद, सरकार बोली– ज़मीन पर तस्वीर बिल्कुल अलग
नई दिल्ली: मनरेगा को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे “बुलडोजर चला दिया” जैसे आरोपों पर केंद्र सरकार ने कड़ा पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा कि अगर सच में मनरेगा पर बुलडोजर चला होता, तो काम बंद हो जाता, मज़दूर घर बैठ जाते और गांवों में रोज़गार खत्म हो जाता। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। सरकार का कहना है कि मनरेगा को खत्म नहीं किया गया, बल्कि इसे और मजबूत, पारदर्शी और प्रभावी बनाया गया है। ज़मीन पर हालात यह बताते हैं कि अब मज़दूरों को पहले से ज़्यादा मौके और समय पर भुगतान मिल रहा है। जहां पहले 100 दिन के रोज़गार की बात थी, अब उसे बढ़ाकर 125 दिन तक किया गया है। इसके साथ ही मज़दूरी भुगतान की व्यवस्था को भी सुधारा गया है। महीनों की देरी के बजाय अब साप्ताहिक भुगतान की दिशा में काम किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों को आर्थिक राहत मिल रही है। फर्जी जॉब कार्ड पर रोक लगाने के लिए बायोमेट्रिक आधारित प्रणाली लागू की गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और सही लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंच रहा है। खेती के मौसम को ध्यान में रखते हुए 60 दिनों का ब्रेक भी सुनिश्चित किया गया है, ताकि किसानों और मजदूरों को किसी तरह की परेशानी न हो। सरकार का कहना है कि यह कोई “बुलडोजर नीति” नहीं, बल्कि सुधार की प्रक्रिया है। सरकार ने साफ किया कि रोज़गार सिर्फ दिनों की गिनती नहीं है, बल्कि गांवों के समग्र विकास की गारंटी है। विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए ग्रामीण रोजगार की नई गारंटी के रूप में VB-GRAM G को आगे बढ़ाया जा रहा है।