ओवैसी का सरकार पर सवाल: बोले— ट्रम्प वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठा सकता है, तो आतंकी भारत क्यों नहीं लाए जाते

By Tatkaal Khabar / 05-01-2026 04:48:20 am | 220 Views | 0 Comments
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AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। मुंबई में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि अगर अमेरिका अपने सैन्य बल के जरिए दूसरे देश में जाकर कार्रवाई कर सकता है, तो भारत 26/11 जैसे आतंकी हमलों के आरोपियों को पकड़कर देश क्यों नहीं ला सकता। ओवैसी ने कहा कि हाल ही में पूरी दुनिया ने देखा कि अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया। उन्होंने इसे उदाहरण बनाते हुए प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि जब “56 इंच के सीने” की बात की जाती है, तो फिर आतंकियों के खिलाफ भी उसी दृढ़ता से कदम उठाए जाने चाहिए। AIMIM प्रमुख ने सीधे प्रधानमंत्री का नाम लेते हुए कहा कि 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दोषी, चाहे वे मसूद अजहर हों या लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अन्य लोग, उन्हें भारत लाया जाना चाहिए। ओवैसी ने तंज कसते हुए पूछा कि अगर ट्रम्प ऐसा कर सकते हैं, तो क्या प्रधानमंत्री मोदी उनसे कम हैं? उन्होंने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने एक समय कहा था— “अबकी बार ट्रम्प सरकार”— ऐसे में अब उसी तरह की सख्ती दिखाने की जरूरत है। ओवैसी ने अपने भाषण में अमेरिका के पुराने सैन्य अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने किसी देश पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति या तानाशाह को गिरफ्तार किया हो। उन्होंने बताया कि 1989 में पनामा में अमेरिका ने तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को सत्ता से हटाकर गिरफ्तार किया था। उस दौरान पनामा सिटी सहित कई इलाकों में भारी बमबारी हुई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। इसी तरह 2003 में इराक पर अमेरिकी हमले का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि उस समय राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाया गया और बाद में उन्हें पकड़कर इराकी अदालत में मुकदमा चलाया गया। ओवैसी ने कहा कि इन घटनाओं से साफ है कि ताकतवर देश अपने हितों के लिए सीमाओं के पार जाकर भी कार्रवाई करते हैं। ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है और एक बार फिर आतंकवाद, विदेश नीति और सरकार की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।