ईरान में सत्ता विरोधी आंदोलन तेज, गोलीबारी में सैकड़ों मौतों का दावा
तेहरान | 10 जनवरी 2026 ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं। देश के खराब आर्थिक हालात, बढ़ती महंगाई, खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतों और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुआ जनआक्रोश अब सीधे सत्ता परिवर्तन की मांग में बदल चुका है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ये प्रदर्शन देश के सभी 31 प्रांतों के 100 से अधिक शहरों और कस्बों तक फैल चुके हैं, जिससे यह हाल के वर्षों का सबसे व्यापक जन आंदोलन बन गया है। प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के बीच मौतों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक ओर आधिकारिक स्तर पर अब तक 62 लोगों की मौत और 2,300 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की बात कही जा रही है, वहीं तेहरान के एक डॉक्टर ने टाइम मैगजीन को बताया कि राजधानी के केवल छह अस्पतालों में ही कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। डॉक्टर के अनुसार, इनमें से अधिकतर लोगों की जान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। जानकारी के मुताबिक, 28 दिसंबर को ईरानी मुद्रा रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद तेहरान के मुख्य बाजारों से विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत हुई थी, जो अब पूरे देश में फैल चुका है। कड़े इंटरनेट प्रतिबंधों और सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद हजारों लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। तेहरान, मशहद और अन्य बड़े शहरों में “तानाशाह का नाश हो” जैसे नारे गूंज रहे हैं, जबकि कुछ इलाकों में रजा पहलवी के नेतृत्व में राजशाही की वापसी के समर्थन में भी आवाजें उठ रही हैं। इस बीच नीति अनुसंधान संगठन इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर का कहना है कि 7 जनवरी के बाद से विरोध-प्रदर्शनों की संख्या और तीव्रता में और बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, शासन ने आंदोलन को दबाने के लिए कार्रवाई तेज कर दी है और कम से कम एक प्रांत में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की जमीनी सेना को भी तैनात किया गया है। हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर ईरान की स्थिति पर टिकी हुई है। ईरान में सत्ता के खिलाफ उबाल, विरोध-प्रदर्शन हिंसक हुए ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ जनआंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। खराब आर्थिक हालात, बढ़ती महंगाई, महंगे खाद्य पदार्थ और कमजोर होती मुद्रा के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन अब खुलकर सत्ता परिवर्तन की मांग में बदल चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, ये विरोध प्रदर्शन देश के सभी 31 प्रांतों के 100 से अधिक शहरों और कस्बों तक फैल चुके हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बीच मौतों के आंकड़ों को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अब तक 62 लोगों की मौत और 2,300 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं, जबकि तेहरान के एक डॉक्टर ने दावा किया है कि राजधानी के सिर्फ छह अस्पतालों में ही कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। बताया गया है कि अधिकतर मौतें पुलिस और सुरक्षा बलों की गोलीबारी से हुई हैं, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। 28 दिसंबर को ईरानी रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद तेहरान के बाजारों से शुरू हुआ विरोध अब पूरे देश में फैल गया है। कड़े इंटरनेट प्रतिबंधों और भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद हजारों लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। तेहरान, मशहद और अन्य बड़े शहरों में “तानाशाह का नाश हो” के नारे गूंज रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर राजशाही की वापसी के समर्थन में भी आवाजें उठ रही हैं। नीति अनुसंधान संस्था इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, 7 जनवरी के बाद से प्रदर्शनों की संख्या और तीव्रता में और इजाफा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है और कुछ प्रांतों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की जमीनी सेना तक को तैनात किया गया है।