ग्रीनलैंड पर ट्रंप की टिप्पणी से डेनमार्क में नाराज़गी, सांसद बोले—सबसे बड़ा खतरा अमेरिका से

By Tatkaal Khabar / 10-01-2026 03:21:07 am | 103 Views | 0 Comments
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कोपेनहेगन | 10 जनवरी 2026 ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों ने डेनमार्क की राजनीति में हलचल मचा दी है। डेनमार्क की कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद रासमस जारलोव ने ट्रंप के बयानों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि किसी सहयोगी देश द्वारा सैन्य कार्रवाई की धमकी देना न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य भी है। उन्होंने इसे मित्र देशों के बीच भरोसे को कमजोर करने वाला कदम बताया। रासमस जारलोव ने कहा कि यह अभूतपूर्व है कि अमेरिका जैसे सहयोगी देश उन राष्ट्रों को धमका रहा है, जिन्होंने कभी उसके खिलाफ कोई शत्रुता नहीं दिखाई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर डेनमार्क जैसे देश को इस तरह की आक्रामक भाषा का सामना करना पड़ रहा है, तो यह पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है। उनके शब्दों में, “अगर डेनमार्क सुरक्षित नहीं है, तो कोई भी देश सुरक्षित नहीं है।” ग्रीनलैंड को लेकर चीन से खतरे के दावों को भी डेनिश सांसद ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड में चीन की मौजूदगी नाममात्र की है—न वहां कोई चीनी दूतावास है, न खनन गतिविधियां, न सैन्य ठिकाने और न ही स्वामित्व। जारलोव के मुताबिक, चीन को लेकर डर की कहानी बेबुनियाद है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका को पहले से ही ग्रीनलैंड में सैन्य पहुंच हासिल है, लेकिन उसने खुद ही अपनी मौजूदगी में भारी कटौती की है। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताते हुए कहा है कि वह इसे “आसान तरीके” से पाना चाहते हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो “कठिन रास्ता” भी अपनाया जा सकता है। ट्रंप का तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों के कारण अमेरिका को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं, हालांकि डेनमार्क इस दावे को सिरे से नकार रहा है। ग्रीनलैंड पर ट्रंप के बयान से डेनमार्क नाराज़, सांसद का पलटवार ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी पर डेनमार्क में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद रासमस जारलोव ने कहा कि किसी सहयोगी देश को सैन्य कार्रवाई की धमकी देना चौंकाने वाला और पूरी तरह अस्वीकार्य है। उनके अनुसार, अमेरिका का यह रुख मित्र देशों के बीच विश्वास को कमजोर करता है। डेनिश सांसद ने चेतावनी दी कि यदि डेनमार्क जैसे शांतिपूर्ण देश को इस तरह की भाषा का सामना करना पड़ रहा है, तो यह दुनिया के अन्य देशों के लिए भी खतरे का संकेत है। उन्होंने साफ कहा कि ग्रीनलैंड की ओर से न तो कोई शत्रुता है और न ही किसी प्रकार का खतरा, इसलिए आक्रामक बयानबाजी का कोई आधार नहीं बनता। चीन से जुड़े दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए जारलोव ने कहा कि ग्रीनलैंड में चीन की मौजूदगी लगभग न के बराबर है। न वहां चीनी दूतावास है, न खनन परियोजनाएं और न ही कोई सैन्य ठिकाना। उन्होंने इसे एक मनगढ़ंत कहानी बताया और याद दिलाया कि अमेरिका के पास पहले से ही ग्रीनलैंड में सैन्य पहुंच है, जिसे उसने खुद काफी हद तक कम किया है। गौरतलब है कि ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम बताते हुए कहा है कि यदि जरूरी हुआ तो सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं। उनका दावा है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन डेनमार्क का कहना है कि इस तर्क के आधार पर किसी सहयोगी देश को धमकाना गलत है।