धर्म आध्यात्मिक परंपरा, हिंदुत्व एक राजनीतिक सोच’— कलकत्ता क्लब डिबेट में मणिशंकर अय्यर का तीखा हमला

By Tatkaal Khabar / 12-01-2026 10:04:13 am | 113 Views | 0 Comments
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कोलकाता | 12 जनवरी 2026 कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। रविवार को कोलकाता क्लब में आयोजित कलकत्ता डिबेटिंग सर्कल की चर्चा के दौरान उन्होंने हिंदुत्व की अवधारणा पर कड़ा प्रहार किया। बहस का विषय था— “क्या हिंदू धर्म को हिंदुत्व से संरक्षण की आवश्यकता है?”— जिस पर बोलते हुए अय्यर ने हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच स्पष्ट अंतर रेखांकित किया। मणिशंकर अय्यर ने कहा कि हिंदू धर्म एक महान और प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा है, जबकि हिंदुत्व एक आधुनिक राजनीतिक विचारधारा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व हिंदू समाज को भय की मानसिकता में दिखाता है, जहां 80 प्रतिशत हिंदुओं को 14 प्रतिशत मुसलमानों से डराया जाता है। उनके अनुसार, यह सोच समाज में असहिष्णुता और हिंसा को बढ़ावा देती है। बहस के दौरान अय्यर ने हिंदुत्व के नाम पर कथित घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी चर्च में क्रिसमस भोज में शामिल होने पर एक आदिवासी बच्ची के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है, तो कभी शॉपिंग मॉल में लगी क्रिसमस सजावट को नुकसान पहुंचाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि विनायक दामोदर सावरकर ने बौद्ध धर्म को हिंदुओं के लिए अस्तित्वगत खतरा बताया था, जो हिंदू धर्म की सार्वभौमिकता और अहिंसा की भावना के विपरीत है। अय्यर ने यह भी कहा कि हिंदुत्व की अवधारणा 1923 में सामने आई, जबकि हिंदू धर्म हजारों वर्षों से बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के जीवित रहा और फलता-फूलता रहा। उन्होंने महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा न केवल अहिंसा, बल्कि हिंदू धर्म की मूल आत्मा का भी अपमान है। उनके अनुसार, हिंदू धर्म को किसी राजनीतिक विचारधारा के सहारे की आवश्यकता नहीं है। ‘हिंदू धर्म आध्यात्मिक है, हिंदुत्व राजनीति’— कलकत्ता क्लब डिबेट में मणिशंकर अय्यर का तीखा बयान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने कलकत्ता क्लब में आयोजित डिबेट 2026 के दौरान हिंदुत्व की विचारधारा पर कड़ा प्रहार किया। बहस के मंच से उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म एक महान आध्यात्मिक परंपरा है, जबकि हिंदुत्व एक राजनीतिक सोच है, जिसे धर्म के समान नहीं देखा जा सकता। अय्यर ने आरोप लगाया कि हिंदुत्व हिंदू समाज को भय की मानसिकता में दिखाता है, जहां बहुसंख्यक समुदाय को अल्पसंख्यकों से डराया जाता है। उनके अनुसार, इस सोच के कारण समाज में असहिष्णुता और हिंसा को बढ़ावा मिल रहा है, जो हिंदू धर्म की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने हिंदुत्व के नाम पर सामने आई कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि क्रिसमस से जुड़े आयोजनों पर आपत्ति और गोरक्षा के नाम पर की गई हिंसा, अहिंसा और सहिष्णुता जैसे मूल्यों का अपमान है। अय्यर ने महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद के विचारों का हवाला देते हुए इन कृत्यों की आलोचना की। मणिशंकर अय्यर ने यह भी कहा कि हिंदुत्व की अवधारणा 1923 में सामने आई, जबकि हिंदू धर्म हजारों वर्षों से बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के जीवित रहा है। उनके अनुसार, हिंदू धर्म को किसी राजनीतिक विचारधारा के सहारे की आवश्यकता नहीं है।