नकली कीटनाशकों पर शिकंजा: तीन साल तक जेल और लाखों का जुर्माना, नया कीटनाशक प्रबंधन विधेयक तैयार
नई दिल्ली | 16 जनवरी 2026 नकली, खतरनाक और अधोमानक कीटनाशकों के कारोबार पर अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है। केंद्र सरकार ने किसानों और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 का मसौदा तैयार किया है। इस विधेयक के तहत नकली या हानिकारक कीटनाशकों के निर्माण, आयात, भंडारण, बिक्री और वितरण में शामिल लोगों को तीन साल तक की कैद या 10 लाख से 40 लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। कृषि मंत्रालय ने इस मसौदे पर 4 फरवरी तक जनता से सुझाव मांगे हैं। मसौदे के अनुसार यदि नकली या जहरीले कीटनाशकों के इस्तेमाल से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है या गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचता है, तो दोषियों को पांच साल तक की जेल या 10 लाख से 50 लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है। इसके अलावा यदि कोई कीटनाशक सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता या लाइसेंस व प्रमाणपत्र से जुड़े नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर 50 हजार से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। जुर्माने की अंतिम राशि तय करने और उसमें बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास रहेगा। नए कानून का उद्देश्य किसानों को असली, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक उपलब्ध कराना है, जिससे फसल उत्पादन बढ़े और हानिकारक रसायनों से होने वाले नुकसान पर रोक लगे। मसौदे में यह भी प्रस्ताव है कि सभी कीटनाशक परीक्षण प्रयोगशालाओं का अनिवार्य रूप से एक्रीडियेशन किया जाएगा, ताकि बाजार में केवल मानक के अनुरूप उत्पाद ही पहुंचें। साथ ही दोषी पाए जाने पर जेल, भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसे कड़े दंडात्मक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। विधेयक में केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति के गठन का भी प्रावधान है। यह तंत्र कीटनाशकों से होने वाली विषाक्तता की घटनाओं को रोकने, निगरानी मजबूत करने और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में काम करेगा। मसौदे में लाइसेंसिंग, लेबलिंग, सुरक्षित निपटान और प्रवर्तन तंत्र की जवाबदेही पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए अनिवार्य लाइसेंस जरूरी होगा और केवल पंजीकृत व निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले कीटनाशक ही बाजार में बेचे जा सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह कानून किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण—तीनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम नकली कीटनाशकों पर सरकार का कड़ा वार, अब जेल और भारी जुर्माने की तैयारी नकली, खतरनाक और घटिया कीटनाशकों के कारोबार पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 का मसौदा तैयार किया है। इस प्रस्ताव के तहत ऐसे कीटनाशकों का निर्माण, आयात, भंडारण या बिक्री करने वालों को तीन साल तक की जेल या 10 लाख से 40 लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। इस मसौदे पर सरकार ने 4 फरवरी तक जनता से सुझाव मांगे हैं। यदि नकली या जहरीले कीटनाशकों के इस्तेमाल से किसी की मौत होती है या गंभीर चोट पहुंचती है, तो सजा और भी सख्त होगी। ऐसे मामलों में दोषियों को पांच साल तक की कैद या 10 लाख से 50 लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, सुरक्षा मानकों का उल्लंघन या लाइसेंस संबंधी नियमों में गड़बड़ी पाए जाने पर 50 हजार से 2 लाख रुपये तक जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। नया कानून किसानों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। मसौदे में सभी कीटनाशक परीक्षण प्रयोगशालाओं के अनिवार्य एक्रीडियेशन का प्रस्ताव है, ताकि हानिकारक रसायनों पर रोक लगे और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिले। इसके साथ ही दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करने जैसे कड़े कदम भी उठाए जाएंगे। विधेयक के तहत केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति का गठन किया जाएगा, जो निगरानी और प्रवर्तन को मजबूत करेगा। लाइसेंसिंग, लेबलिंग और सुरक्षित निपटान पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सुनिश्चित करेगा।