जी20 में बोले डॉ. जयशंकर- सैन्य विकल्पों से नहीं, कूटनीति से हल होंगे वैश्विक संकट
अटलांटा। अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक और क्वाड देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक के मंच से भारत ने एक बार फिर वैश्विक संकटों के समाधान के लिए शांति और कूटनीति का कड़ा संदेश दिया है। इन बैठकों में भारत का पक्ष रखते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में दुनिया जिन गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, उनका समाधान युद्ध या सैन्य विकल्पों के जरिए कभी नहीं निकाला जा सकता। एक मुख्य प्लेनरी सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. जयशंकर ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने रेखांकित किया कि दुनिया इस समय जिस ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, वह उत्पादन की किसी कमी का नतीजा नहीं है। इसके विपरीत, यह संकट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता, कृत्रिम रुकावटों, अत्यधिक महंगी लागत और संसाधनों तक विकासशील देशों की पहुंच की चुनौतियों के कारण पैदा हुआ है। उन्होंने आगाह किया कि ऊर्जा प्रवाह का राजनीतिकरण करना और जानबूझकर ऊर्जा व्यापार को बंधक बनाना बेहद हानिकारक है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा 'ग्लोबल साउथ' के कम आय वाले देशों को भुगतना पड़ रहा है। बैठक से इतर विदेश मंत्री ने भारतीय राजनयिकों से भी मुलाकात की। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा अमेरिका में तैनात भारतीय महावाणिज्य दूतों (कॉन्सुल जनरल) के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा हुई। व्यापार, नवाचार, शिक्षा और सामुदायिक जुड़ाव से जुड़ी नई पहलों और मंचों के बारे में जानकारी दी गई। यह हमारे संबंधों के व्यापक और गहरे स्वरूप को दर्शाता है। विदेश मंत्री ने भारत के कूटनीतिक विकल्पों को विस्तार देते हुए कनाडा, ब्राजील, अर्जेंटीना, मैक्सिको और जर्मनी के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग गहन द्विपक्षीय बैठकें कीं। कनाडाई समकक्ष अनीता आनंद के साथ मुलाकात में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक जुड़ाव की समीक्षा की गई। अर्जेंटीना के विदेश मंत्री पाब्लो किर्नो और ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा के साथ हुई वार्ता मुख्य रूप से महत्वपूर्ण खनिजों (जैसे लिथियम), रक्षा सहयोग, परमाणु सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित रही। जर्मनी के विदेश मंत्री और मैक्सिको के विदेश मंत्री रॉबर्टो वेलास्को अल्वारेज़ के साथ व्यापार वृद्धि, उन्नत प्रौद्योगिकी और बहुपक्षीय मंचों पर आपसी तालमेल बढ़ाने को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। (रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)