17 सितंबर को होगी विश्वकर्मा पूजा, राहु काल में रहें सावधान
दिल्ली, 16 सितंबर 2026 इस वर्ष भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर, गुरुवार को की जाएगी। वैदिक पंचांग के अनुसार, इसी दिन सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश को कन्या संक्रांति कहा जाता है और इसी अवसर पर भगवान विश्वकर्मा के पूजन की परंपरा रही है। उन्हें सृष्टि का वास्तुकार और शिल्पकार माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों, प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों तथा अन्य उपकरणों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की आराधना से व्यापार में प्रगति, मशीनों की सुरक्षा और कार्यक्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी वजह से शिल्प, निर्माण और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोगों के लिए इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है। 17 सितंबर को सुबह 7:58 बजे से 10:43 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। दोपहर में 12:15 बजे से 1:48 बजे तक और शाम को 4:52 बजे से 6:24 बजे तक भी पूजा की जा सकती है। श्रद्धालु इन निर्धारित शुभ समयों में भगवान विश्वकर्मा का पूजन कर सकते हैं। 17 सितंबर को दोपहर 1:48 बजे से 3:20 बजे तक राहु काल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। ऐसे में विश्वकर्मा पूजा के लिए राहु काल से पहले या इसके बाद दिए गए शुभ समय का चयन किया जा सकता है। पूजा के लिए सबसे पहले चौकी पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करें और उसके आसपास काम से जुड़े औजार व उपकरण रखें। पुष्प और अक्षत हाथ में लेकर पूजा मंत्र का पाठ करें और चारों दिशाओं में अक्षत छिड़कें। इसके बाद पुष्प जलपात्र में अर्पित कर भगवान का ध्यान करें। घी का दीपक जलाकर जल, पुष्प और सुपारी हाथ में लेकर पूजा का संकल्प लें। पूजन स्थल के पास अष्टदल कमल का आकार बनाकर उस पर जल अर्पित करें। कलश में पंचपल्लव, सप्त मृत्तिका, सुपारी और दक्षिणा डालें। इसके बाद भगवान विष्णु को फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। पूजा पूरी करने के बाद भगवान विश्वकर्मा के मंत्रों का जाप और उनकी कथा का श्रवण करें।