बांग्लादेश में हिंसा की डरावनी स्वीकारोक्ति: छात्र नेता ने हिंदू पुलिस अफसर को जिंदा जलाने का किया दावा, वीडियो से मचा हड़कंप
हबीगंज (बांग्लादेश) | जनवरी 3,2026 बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का एक और भयावह चेहरा सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने पूरे देश में आक्रोश और चिंता पैदा कर दी है, जिसमें एक कथित छात्र नेता खुलेआम यह दावा करता दिख रहा है कि उसने और उसके साथियों ने एक हिंदू पुलिस अधिकारी को जिंदा जला दिया। यह वीडियो पत्रकार और लेखक साहिदुल हसन खोकोन द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया गया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में दिख रहा युवक खुद को हबीगंज जिले का छात्र समन्वयक बताता है और पुलिस अधिकारियों को खुलेआम धमकी देता नजर आता है। वह बिना किसी भय या पछतावे के कहता है कि जुलाई 2024 के आंदोलन के दौरान उसके समूह ने एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी और वहीं तैनात हिंदू सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू को जिंदा जला दिया। हैरानी की बात यह है कि यह बयान वह एक पुलिस थाने के भीतर बैठकर दे रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बयान के सामने आने के बाद अगस्त 2024 की वह भयावह घटना एक बार फिर चर्चा में आ गई है, जब हबीगंज जिले के बनियाचोंग थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू की भीड़ द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना उस समय हुई थी जब देश में राजनीतिक तनाव चरम पर था और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे से कुछ घंटे पहले इलाके में हिंसा भड़क उठी थी। बताया गया कि पहले उग्र भीड़ ने पुलिस स्टेशन पर हमला किया था, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें कुछ लोग मारे गए। इसके बाद देर रात भीड़ दोबारा लौटी और सेना की मौजूदगी में यह शर्त रखी कि बाकी पुलिसकर्मियों को छोड़ दिया जाएगा, लेकिन सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू को उनके हवाले किया जाए। रात करीब ढाई बजे उनकी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर और जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई। हबीगंज जिला मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जहां हिंदू आबादी लगभग 16 प्रतिशत बताई जाती है। इस घटना और हाल में सामने आए वीडियो ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि खुलेआम हिंसा पर गर्व करना और दोषियों का बेखौफ होना, देश में कानून-व्यवस्था की कमजोर स्थिति को उजागर करता है। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कई यूजर्स का कहना है कि यदि ऐसे बयान बिना किसी डर के दिए जा सकते हैं, तो अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर खतरा और भी गहरा हो जाता है। : ‘हमने उसे जिंदा जला दिया’: पुलिस SI संतोष की हत्या पर छात्र नेता का दावा, वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने देशभर में आक्रोश फैला दिया है, जिसमें एक कथित छात्र नेता खुलेआम एक हिंदू पुलिस अधिकारी की लिंचिंग पर डींग मारता नजर आ रहा है। यह वीडियो सामने आने के बाद कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। यह वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पत्रकार और लेखक साहिदुल हसन खोकोन द्वारा साझा किया गया है। वीडियो में दिख रहा युवक खुद को हबीगंज जिले का छात्र समन्वयक बताता है और पुलिस अधिकारियों को खुलेआम धमकी देता दिखाई देता है। वह दावा करता है कि जुलाई 2024 के आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया था और हिंदू सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू को जिंदा जला दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि युवक यह बयान एक पुलिस थाने के भीतर बैठकर देता है, और उसके चेहरे पर न डर है, न ही किसी तरह का पछतावा। इस बयान के बाद अगस्त 2024 की वह दर्दनाक घटना फिर से चर्चा में आ गई है, जब हबीगंज जिले के बनियाचोंग थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू की भीड़ द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे से कुछ घंटे पहले हुई थी, जब पूरे इलाके में राजनीतिक तनाव चरम पर था। बताया जाता है कि हिंसक भीड़ ने पहले पुलिस स्टेशन पर हमला किया था। हालात बेकाबू होने पर पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिसमें कुछ लोगों की मौत हो गई। इसके बाद देर रात भीड़ दोबारा संगठित होकर लौटी और सेना की मौजूदगी में अन्य पुलिसकर्मियों को छोड़ने के बदले सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू को सौंपने की शर्त रखी। आधी रात के बाद करीब ढाई बजे उनकी पीट-पीटकर लिंचिंग कर दी गई। हबीगंज जिला मुस्लिम बहुल इलाका है, जहां हिंदू आबादी करीब 16 प्रतिशत बताई जाती है। इस घटना और हालिया वायरल वीडियो ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस तरह खुलेआम हिंसा पर गर्व करना और अपराध स्वीकार करना, देश की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि अगर ऐसे बयान देने वाले लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तो इससे अल्पसंख्यकों में असुरक्षा और डर और गहराएगा।