अरबपतियों के बढ़ते सियासी असर के बीच भारत की आरक्षण व्यवस्था बनी वैश्विक मिसाल: ऑक्सफैम रिपोर्ट

By Tatkaal Khabar / 19-01-2026 06:43:51 am | 25 Views | 0 Comments
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नई दिल्ली | 19 जनवरी 2026 विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के पहले दिन जारी हुई ऑक्सफैम की नई असमानता रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में अरबपतियों के बढ़ते वर्चस्व पर गंभीर चिंता जताई है। इसी रिपोर्ट में भारत की आरक्षण प्रणाली को लोकतांत्रिक शक्ति के संतुलन और विकेंद्रीकरण का मजबूत उदाहरण बताया गया है। ऑक्सफैम ने कहा है कि जहां दुनिया के कई देशों में धनकुबेर राजनीति पर हावी हो रहे हैं, वहीं भारत का आरक्षण मॉडल आम नागरिकों को सत्ता में भागीदारी का अवसर देता है। ऑक्सफैम इंटरनेशनल की रिपोर्ट ‘रेसिस्टिंग द रूल ऑफ द रिच’ के मुताबिक, अरबपति आम लोगों की तुलना में करीब 4,000 गुना अधिक राजनीतिक पदों तक पहुंच रखते हैं। इससे लोकतंत्र पर असमान दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अरबपतियों की बढ़ती संपत्ति और राजनीतिक पकड़ नीति निर्माण को प्रभावित कर रही है, जिससे गरीब और वंचित वर्ग और पीछे छूटते जा रहे हैं। रिपोर्ट में भारत की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित वर्गों के लिए लागू राजनीतिक आरक्षण की खास तौर पर सराहना की गई है। ऑक्सफैम का कहना है कि इस व्यवस्था ने उन समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया है, जिन्हें लंबे समय तक सत्ता से दूर रखा गया। हाल ही में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और शिक्षा व सरकारी नौकरियों में कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण को भी लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम बताया गया है। ऑक्सफैम ने यह भी कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब आम लोगों को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी मिले। इसके लिए पारदर्शी शासन, जवाबदेह राजनीति, मजबूत संस्थाएं और जमीनी संगठनों की भूमिका जरूरी है। रिपोर्ट में ब्राजील के सहभागी बजट मॉडल का भी उल्लेख किया गया है, जहां नागरिकों को बजट तय करने का अधिकार मिला। अंत में ऑक्सफैम ने सरकारों से अपील की है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध और सूचना तक पहुंच सुनिश्चित करें, ताकि लोकतंत्र केवल अमीरों तक सीमित न रह जाए। अरबपतियों के बढ़ते दबदबे के बीच भारत का आरक्षण मॉडल बना लोकतंत्र की पहचान: ऑक्सफैम रिपोर्ट दुनिया भर में राजनीति पर अरबपतियों के बढ़ते असर के बीच भारत की आरक्षण व्यवस्था एक मजबूत लोकतांत्रिक उदाहरण बनकर सामने आई है। विश्व आर्थिक मंच की बैठक के पहले दिन जारी ऑक्सफैम की असमानता रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का आरक्षण मॉडल सत्ता और प्रतिनिधित्व को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अरबपति आम नागरिकों की तुलना में हजारों गुना ज्यादा राजनीतिक पदों तक पहुंच रखते हैं, जिससे लोकतंत्र असंतुलित हो रहा है। धन और ताकत के इस मेल से नीतियां भी सीमित वर्ग के हित में बनने लगी हैं, जबकि बड़ी आबादी आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है। ऑक्सफैम ने भारत की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित वर्गों के लिए राजनीतिक आरक्षण की सराहना की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस व्यवस्था ने हाशिये पर रहे समुदायों को आवाज दी और उन्हें फैसलों की प्रक्रिया में शामिल किया। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को भी समान भागीदारी की दिशा में बड़ा कदम बताया गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मजबूत लोकतंत्र के लिए जवाबदेह शासन, पारदर्शिता और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जमीनी संगठन, ट्रेड यूनियन और सामाजिक आंदोलन लोकतंत्र को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऑक्सफैम का मानना है कि भारत का आरक्षण मॉडल दिखाता है कि सही नीतियों से सत्ता का लोकतांत्रिक बंटवारा संभव है।