गणतंत्र दिवस पर बदलेगी परंपरा, कर्तव्य पथ पर गूंजेगा वंदे मातरम, सिमरन रचेंगी नया इतिहास
नई दिल्ली | 20 जनवरी 2026 इस वर्ष का गणतंत्र दिवस देश के इतिहास में कई मायनों में खास होने जा रहा है। आज़ादी के 77 साल बाद पहली बार गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत और समापन राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की धुन के साथ होगा। भारत सरकार ने वर्षों पुरानी परंपरा में यह बड़ा बदलाव करते हुए परेड को एक नई सांस्कृतिक पहचान देने का फैसला किया है। 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया वंदे मातरम की वह धुन सुनेगी, जो कभी एक गीत से आगे बढ़कर स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज़ बनी थी। वंदे मातरम कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन संगीत नाटक अकादेमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा को सौंपी गई है। परेड के आगाज में देशभर से आए 200 लोक और जनजातीय कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में अपने वाद्य यंत्रों पर वंदे मातरम की मूल धुन प्रस्तुत करेंगे। वहीं समापन अवसर पर 2,300 से अधिक कलाकार इसी धुन पर भव्य लोकनृत्य पेश करेंगे। वंदे मातरम थीम की रचनात्मक परिकल्पना डॉ. संध्या पुरेचा ने की है, संगीत एम.एम. कीरवानी ने तैयार किया है, स्क्रिप्ट सुभाष सहगल की है और कोरियोग्राफी संतोष नायर द्वारा की जा रही है। इस बार की परेड केवल सांस्कृतिक बदलाव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महिला सशक्तिकरण का भी सशक्त संदेश देगी। जम्मू-कश्मीर के राजोरी जिले की रहने वाली 26 वर्षीय असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला इतिहास रचने जा रही हैं। वह पहली महिला अधिकारी होंगी जो कर्तव्य पथ पर सीआरपीएफ के 140 से अधिक पुरुष जवानों के मार्चिंग दस्ते का नेतृत्व करेंगी। अब तक महिला अधिकारी टुकड़ियों की कमान संभालती रही हैं, लेकिन पुरुष दस्ते का नेतृत्व पहली बार किसी महिला के हाथ में होगा। सिमरन बाला वर्तमान में बस्तरिया बटालियन में तैनात हैं और वह अपने जिले से सीआरपीएफ में अधिकारी बनने वाली पहली महिला हैं। उन्होंने जम्मू के गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वुमेन, गांधीनगर से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया और यूपीएससी की सीएपीएफ परीक्षा पास कर अप्रैल 2025 में सीआरपीएफ में कमीशन प्राप्त किया। इस बार की परेड में सीआरपीएफ और एसएसबी की महिला डेयर डेविल्स टीम भी बुलेट बाइक पर रोमांचक करतब दिखाएगी, जो गणतंत्र दिवस के जश्न को और खास बना देगी। गणतंत्र दिवस पर परंपरा में नया मोड़, कर्तव्य पथ पर गूंजेगा वंदे मातरम, सिमरन रचेंगी नया इतिहास इस बार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड देश के लिए एक ऐतिहासिक पल लेकर आ रही है। आज़ादी के 77 साल बाद पहली बार परेड की शुरुआत और समापन राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की धुन के साथ होगा। वर्षों से चली आ रही परंपरा में यह बड़ा बदलाव किया गया है, जिससे परेड को एक नई सांस्कृतिक पहचान मिलेगी। कर्तव्य पथ पर परेड की शुरुआत 200 लोक और जनजातीय कलाकारों द्वारा वाद्य यंत्रों पर वंदे मातरम की मूल धुन से होगी। ये कलाकार देश के अलग-अलग हिस्सों से अपनी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे। वहीं समापन अवसर पर 2,300 से अधिक कलाकार वंदे मातरम की धुन पर भव्य लोकनृत्य प्रस्तुत करेंगे, जो दर्शकों के लिए खास आकर्षण होगा। वंदे मातरम कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी संगीत नाटक अकादेमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा को दी गई है। इस विशेष प्रस्तुति का संगीत एम.एम. कीरवानी ने तैयार किया है, स्क्रिप्ट सुभाष सहगल की है और नृत्य संयोजन संतोष नायर द्वारा किया गया है। यह पूरी प्रस्तुति देश की एकता और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाएगी। इस बार की परेड में एक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिलेगा। जम्मू-कश्मीर की 26 वर्षीय असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला पहली बार सीआरपीएफ के पुरुष जवानों के मार्चिंग दस्ते का नेतृत्व करेंगी। इसके साथ ही महिला डेयर डेविल्स टीम बुलेट बाइक पर रोमांचक करतब दिखाकर परेड को और यादगार बनाएगी