Ola-Uber-Rapido हड़ताल: टैक्सी-ऑटो ड्राइवरों का प्रदर्शन, बोले— अवैध बाइक टैक्सी और महंगे पैनिक बटन से रोज़ी-रोटी पर संकट

By Tatkaal Khabar / 07-02-2026 10:27:11 am | 98 Views | 0 Comments
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महाराष्ट्र | 7 फरवरी 2026 देशभर में ऐप-आधारित टैक्सी और ऑटो ड्राइवर शनिवार को एक दिन की हड़ताल पर उतर आए। इस हड़ताल के पीछे ड्राइवरों की कई गंभीर समस्याएं हैं, जिनमें अवैध बाइक टैक्सी सेवाएं, ऐप कंपनियों की मनमानी किराया नीतियां और पैनिक बटन इंस्टॉलेशन की बढ़ती लागत शामिल हैं। ड्राइवरों का कहना है कि इन वजहों से उनकी आमदनी घट रही है और सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। यह हड़ताल महाराष्ट्र कमगार सभा यूनियन की ओर से बुलाई गई थी। यूनियन का कहना है कि उनका मकसद सरकार और कंपनियों का ध्यान उन मुद्दों की ओर खींचना है, जो लंबे समय से ड्राइवरों को परेशान कर रहे हैं। यूनियन के अनुसार, अवैध बाइक टैक्सी सेवाएं बिना किसी नियम और बीमा के चल रही हैं, जिससे लाइसेंसधारी टैक्सी और ऑटो चालकों की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है। महाराष्ट्र कमगार सभा के प्रमुख डॉ. केशव क्षीरसागर ने बताया कि हड़ताल सुबह से ही महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में शुरू हो गई थी और अधिकतर ड्राइवरों ने इसमें हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों ने अपने वाहन सड़कों पर नहीं निकाले, ताकि विरोध दर्ज कराया जा सके और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाए। हालांकि, यूनियन के दावों के बावजूद ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप्स पर सुबह से टैक्सी और ऑटो बुकिंग उपलब्ध दिखाई दी। इससे यह साफ हुआ कि कुछ ड्राइवरों ने हड़ताल में हिस्सा नहीं लिया या फिर सेवाएं आंशिक रूप से जारी रहीं। ड्राइवरों की सबसे बड़ी परेशानी पैनिक बटन इंस्टॉलेशन को लेकर है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया अब महंगी और जटिल हो गई है। केंद्र सरकार ने 140 कंपनियों को पैनिक बटन लगाने की मंजूरी दी थी, लेकिन राज्य सरकार ने इनमें से लगभग 70 प्रतिशत कंपनियों को अनधिकृत बता दिया। ऐसे में ड्राइवरों को पुराने डिवाइस हटाकर नए लगाने पड़ रहे हैं, जिस पर करीब 12,000 रुपये तक खर्च आ रहा है। इसके अलावा खुले परमिट नीति के चलते ऑटो की संख्या बढ़ने से भी कमाई पर असर पड़ा है। ड्राइवरों ने यह भी चिंता जताई कि अगर किसी अवैध बाइक टैक्सी से दुर्घटना होती है, तो पीड़ित को बीमा का कोई लाभ नहीं मिलता। ड्राइवरों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में ऐसे आंदोलन और तेज़ हो सकते हैं। Ola-Uber-Rapido हड़ताल: टैक्सी-ऑटो ड्राइवरों का देशभर में विरोध, बोले— कमाई और सुरक्षा दोनों खतरे में देशभर के ऐप-आधारित टैक्सी और ऑटो ड्राइवर शनिवार को एक दिन की हड़ताल पर रहे। ड्राइवरों का कहना है कि अवैध बाइक टैक्सी सेवाएं, ऐप कंपनियों की मनमानी किराया नीतियां और पैनिक बटन इंस्टॉलेशन की बढ़ती लागत उनकी आमदनी पर सीधा असर डाल रही है। हड़ताल का उद्देश्य इन समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान खींचना है। यह हड़ताल महाराष्ट्र कमगार सभा यूनियन की ओर से बुलाई गई थी। यूनियन प्रमुख डॉ. केशव क्षीरसागर के अनुसार हड़ताल सुबह से महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में शुरू हुई और बड़ी संख्या में ड्राइवरों ने समर्थन दिया। ड्राइवरों ने अपने वाहन सड़कों से दूर रखकर विरोध दर्ज कराया। ड्राइवरों का कहना है कि अवैध बाइक टैक्सी सेवाओं से लाइसेंसधारी चालकों की कमाई घट रही है और दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों को बीमा का लाभ भी नहीं मिलता। इसके साथ ही पैनिक बटन लगवाना अब महंगा हो गया है, क्योंकि पुराने उपकरण हटाकर नए लगाने पर करीब 12,000 रुपये तक खर्च आ रहा है। हालांकि यूनियन ने हड़ताल को सफल बताया, लेकिन ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप्स पर टैक्सी और ऑटो सेवाएं सुबह से उपलब्ध दिखीं। ड्राइवरों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो भविष्य में ऐसे आंदोलन और तेज किए जा सकते हैं।