काशी ने तोड़ा चीन का वृक्षारोपण रिकॉर्ड, 2.45 लाख पौधों से बना विश्व कीर्तिमान
वाराणसी | 1 मार्च 2026 काशी ने सुजाबाद डोमरी में 350 बीघा क्षेत्र में 2,45,103 पौधे लगाकर चीन के 1,53,981 पौधों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस आधुनिक ‘शहरी वन’ परियोजना में मियावाकी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, और इसे 60 सेक्टरों में बांटा गया है, जिनके नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों पर रखे गए हैं। नगर निगम के महापौर अशोक कुमार तिवारी और आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का नेतृत्व किया, जिसमें लगभग 15,000 लोगों ने योगदान दिया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम भी इस मौके पर मौजूद रही। इस ‘शहरी वन’ परियोजना का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना है बल्कि यह नगर निगम के लिए आय का भी स्रोत बनेगी। इसमें आम, अमरूद, पपीता के साथ अश्वगंधा, शतावरी और गिलोय जैसी औषधीय पौधों का रोपण किया गया है। गुलाब, चमेली और पारिजात के फूलों की खेती से भी राजस्व प्राप्ति का मॉडल तैयार किया गया है। तीन लाख पौधों को बचाने के लिए मियावाकी पद्धति के साथ आधुनिक सिंचाई प्रणाली जैसे 10 बोरवेल, 360 रेन गन और 10,827 मीटर लंबी पाइपलाइन का उपयोग किया गया है। मियावाकी तकनीक जापानी वनस्पति शास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई है, जिससे घने और देशी जंगल बहुत कम समय में उगाए जा सकते हैं। इस विधि से लगाए गए पौधे सामान्य पौधों की तुलना में दस गुना तेजी से बढ़ते हैं और दो-तीन साल में स्वयं जीवित रहने योग्य हो जाते हैं। 27 देशी प्रजातियों जैसे शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस को नदी किनारे की मिट्टी की सुरक्षा के लिए प्राथमिकता दी गई है। वन के भीतर चार किलोमीटर लंबा पाथवे भी पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बनाया गया है। काशी अब धर्म, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। इससे पहले काशी ने देव दीपावली पर लाखों दीयों की प्रदर्शनी, सामूहिक योग अभ्यास और संगीत कार्यक्रमों के रिकॉर्ड भी दर्ज किए हैं। अब 2.45 लाख पौधों के शहरी वन के साथ काशी ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित कर विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। काशी ने तोड़ा चीन का वृक्षारोपण रिकॉर्ड, 2.45 लाख पौधों से बना विश्व कीर्तिमान काशी ने सुजाबाद डोमरी में 350 बीघा क्षेत्र में 2,45,103 पौधे लगाकर चीन के 1,53,981 पौधों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस आधुनिक ‘शहरी वन’ परियोजना में मियावाकी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, और इसे 60 सेक्टरों में बांटा गया है, जिनके नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों पर रखे गए हैं। नगर निगम के महापौर अशोक कुमार तिवारी और आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का नेतृत्व किया, जिसमें लगभग 15,000 लोगों ने योगदान दिया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम भी इस मौके पर मौजूद रही। इस ‘शहरी वन’ परियोजना का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना है बल्कि यह नगर निगम के लिए आय का भी स्रोत बनेगी। इसमें आम, अमरूद, पपीता के साथ अश्वगंधा, शतावरी और गिलोय जैसी औषधीय पौधों का रोपण किया गया है। गुलाब, चमेली और पारिजात के फूलों की खेती से भी राजस्व प्राप्ति का मॉडल तैयार किया गया है। तीन लाख पौधों को बचाने के लिए मियावाकी पद्धति के साथ आधुनिक सिंचाई प्रणाली जैसे 10 बोरवेल, 360 रेन गन और 10,827 मीटर लंबी पाइपलाइन का उपयोग किया गया है। मियावाकी तकनीक जापानी वनस्पति शास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई है, जिससे घने और देशी जंगल बहुत कम समय में उगाए जा सकते हैं। इस विधि से लगाए गए पौधे सामान्य पौधों की तुलना में दस गुना तेजी से बढ़ते हैं और दो-तीन साल में स्वयं जीवित रहने योग्य हो जाते हैं। 27 देशी प्रजातियों जैसे शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस को नदी किनारे की मिट्टी की सुरक्षा के लिए प्राथमिकता दी गई है। वन के भीतर चार किलोमीटर लंबा पाथवे भी पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बनाया गया है। काशी अब धर्म, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। इससे पहले काशी ने देव दीपावली पर लाखों दीयों की प्रदर्शनी, सामूहिक योग अभ्यास और संगीत कार्यक्रमों के रिकॉर्ड भी दर्ज किए हैं। अब 2.45 लाख पौधों के शहरी वन के साथ काशी ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित कर विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।