दिल्ली HC का बड़ा फैसला, EWS छात्रों को नहीं मिलेगा स्कूल चुनने का विकल्प

By Tatkaal Khabar / 04-04-2026 07:31:53 am | 137 Views | 0 Comments
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Delhi High Court EWS quota ruling: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार होने का मतलब यह नहीं है कि कोई स्टूडेंट अपनी पसंद के विशेष स्कूल में ही एडमिशन पाने का दावा कर सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत दाखिले की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कल्याणकारी व्यवस्था है जिसका उद्देश्य सामाजिक समावेशन सुनिश्चित करना है लेकिन इसे किसी विशेष स्कूल चुनने के अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता।

दरअसल एक अभिभावक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने बच्चे को निजी स्कूल में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत दाखिला दिलाने की मांग की थी। बच्चे को शिक्षा निदेशालय द्वारा लॉटरी प्रणाली के माध्यम से एक स्कूल आवंटित किया गया लेकिन उस स्कूल ने दाखिला देने से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे को वैकल्पिक रूप से एक अन्य पसंदीदा स्कूल आवंटित किया गया लेकिन अभिभावक ने वहां रिपोर्ट नहीं किया और सीधे कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब शैक्षणिक सत्र समाप्त हो चुका हो और याचिका के दौरान कोई अंतरिम आदेश (जैसे सीट सुरक्षित रखने का निर्देश) न दिया गया हो तो बाद में उस वर्ष के लिए प्रवेश का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है।


खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में कोर्ट किसी स्टूडेंट के लिए अतिरिक्त सीट सृजित नहीं कर सकती। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह का इनकार उचित नहीं था, खासकर तब जब बच्चे की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही एक व्यवस्था की जा चुकी थी। कोर्ट ने मेडिकल दाखिलों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले पर निर्भरता को भी यह कहते हुए कि खारिज कर दिया कि इस तरह की असाधारण राहतें केवल दुर्लभ मामलों में और सख्त समय-सीमा के भीतर ही लागू होती हैं, जो इस वर्तमान मामले में पूरी नहीं हुई थीं।