काशी का वैदिक वैभव बना विश्व चर्चा का केंद्र
वाराणसी, 3 मई 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के चलते काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित “विक्रमादित्य वैदिक घड़ी” को वैश्विक स्तर पर व्यापक पहचान मिल रही है। हाल ही में उनके दौरे और उल्लेख के बाद इस अनूठी घड़ी ने देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर इसे लेकर तेज़ी से रुचि बढ़ी है। यह वैदिक घड़ी पारंपरिक भारतीय समय गणना पद्धति पर आधारित है, जिसमें दिन की गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की जाती है। इसमें 30 मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति जैसी जानकारियाँ प्रदर्शित होती हैं। साथ ही यह आधुनिक समय (IST और GMT) भी दिखाती है, जिससे यह प्राचीन और आधुनिक विज्ञान का अनोखा संगम बन जाती है। इस घड़ी को “वैश्विक पहचान” मिलने का मुख्य कारण इसका डिजिटल विस्तार और व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँचना है। प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद इसके वीडियो और जानकारी को लाखों लोगों ने देखा और साझा किया, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय प्राचीन समय गणना प्रणाली को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुनर्जीवित करना और आम लोगों तक पहुँचाना है। भविष्य में ऐसी वैदिक घड़ियों को देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी स्थापित करने की योजना है, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ा जा सके।