विदेश राज्य मंत्री ने आर्कटिक असेंबली में पिघलते ध्रुवों पर रखा भारत का नजरिया

By Tatkaal Khabar / 12-10-2026 12:26:28 pm | 152 Views | 0 Comments
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रेकजाविक। जलवायु परिवर्तन के वैश्विक खतरों के बीच, विदेश और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने आइसलैंड के रेकजाविक में आयोजित आर्कटिक सर्कल असेंबली (एसीए) 2026 की सालाना बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। वह तीन दिनों की आइसलैंड के कूटनीतिक दौरे पर थे, जहां उन्होंने ध्रुवीय क्षेत्रों में हो रहे बदलावों और वैश्विक जलवायु तंत्र पर उनके प्रभावों को लेकर भारत का दृष्टिकोण मजबूती से प्रस्तुत किया। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार असेंबली के दौरान, राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने "पिघलते ध्रुव: भारत और सिंगापुर का नज़रिया" नामक एक महत्वपूर्ण प्लेनरी सत्र में हिस्सा लिया। इस दौरान भारत ने रेखांकित किया कि आर्कटिक में बढ़ता तापमान केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर में समुद्र के स्तर, मौसम के पैटर्न और जैव विविधता को प्रभावित कर रहा है। भारत ने विशेष रूप से आर्कटिक, हिमालय (तीसरा ध्रुव) और वैश्विक जलवायु प्रणालियों के बीच के अंतर्संबंधों पर ज़ोर दिया। मंत्रालय ने बताया इस वैश्विक मंच पर भारत की ओर से एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसका विषय था "आर्कटिक और जलवायु परिवर्तन: ऑब्जर्वर देशों का नज़रिया"। इस सत्र की शुरुआत करते हुए राज्य मंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि भूगोल कभी भी जलवायु प्रणालियों की सीमाएं तय नहीं कर सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि भारत आर्कटिक से भौगोलिक रूप से दूर है, लेकिन वहां आने वाले बदलावों का सीधा असर भारतीय मानसून और कृषि चक्र पर पड़ता है। अपने कूटनीतिक वक्तव्य में राज्य मंत्री ने 'भारत की आर्कटिक नीति 2022' का संदर्भ दिया, जो विज्ञान, पर्यावरण, आर्थिक विकास, कनेक्टिविटी, प्रशासन और क्षमता निर्माण के छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। उन्होंने स्वालबार्ड में स्थित भारत के 'हिमाद्री' अनुसंधान स्टेशन का जिक्र करते हुए विज्ञान-प्रथम दृष्टिकोण, पोलर रिसर्च और सतत विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। इससे इतर सिंह ने आइसलैंड के पर्यावरण, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन मंत्री जोहान पॉल जोहानसन के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की, जिसके बाद उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा स्वच्छ/नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने के अवसरों पर सार्थक बातचीत हुई। हम इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपने जुड़ाव को और गहरा करने तथा दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। (रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)