प्रयागराज में जमीन के नीचे मिला नोटों का खजाना, पुलिस ने तीन ड्रमों से बरामद की नकदी

By Tatkaal Khabar / 30-10-2026 07:13:51 am | 73 Views | 0 Comments
#

लखनऊ, 30 अक्टूबर 2026 प्रयागराज के बरईपुर गांव में एक स्थानीय विवाद की जांच के दौरान पुलिस को ऐसी जानकारी मिली, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। नवाबगंज इलाके में राकेश यादव के पुश्तैनी मकान की तलाशी लेने पहुंची पुलिस को जमीन के भीतर छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में नकदी मिली। पुलिस के मुताबिक, तीन नीले ड्रमों में 500 रुपये के नोटों की गड्डियां कपड़े में लपेटकर रखी गई थीं। बरामद रकम करीब 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। बुधवार रात हुई इस कार्रवाई के बाद मकान को सील कर दिया गया। मामले की शुरुआत करीब पांच-छह दिन पहले हुई, जब राकेश यादव का कुछ पड़ोसियों से विवाद हुआ। इस घटना के संबंध में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस कार्रवाई के दौरान राकेश की एक दरोगा से बहस भी हुई। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और पुलिस को घर में कथित तौर पर चोरी की रकम छिपाए जाने की सूचना मिली। यह जानकारी पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया तक पहुंची, जिसके बाद मकान की तलाशी लेने का फैसला किया गया। बुधवार शाम करीब छह बजे डीसीपी (गंगानगर) सोनम कुमार, एडीसीपी पुष्कर वर्मा और अन्य पुलिसकर्मी गांव पहुंचे। तलाशी शुरू करने से पहले पूरे गांव की बिजली कटवा दी गई। सोरांव की एसीपी श्यामजीत प्रमिला सिंह भी मौके पर मौजूद रहीं। तलाशी के दौरान जमीन में दबे तीन ड्रम सामने आए, जिनमें नकदी रखी गई थी। पुलिस ने रकम अपने कब्जे में लेने के बाद मकान सील कर दिया। करीब साढ़े चार घंटे तक चली कार्रवाई के बाद पुलिस रात साढ़े दस बजे के आसपास वहां से लौटी। कार्रवाई के दौरान राकेश यादव के भाई बबलू को हिरासत में लिया गया। पुलिस परिवार के अन्य सदस्यों को भी अपने साथ ले गई है। मकान के चारों ओर 40 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। घर के साथ बगीचे और आसपास की खाली जमीन को भी घेर दिया गया है। अब जांच का अहम पहलू बरामद नकदी का स्रोत और उसे जमीन के नीचे छिपाकर रखने के पीछे की वजह है। हालांकि, इन सवालों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। ग्रामीणों के मुताबिक, राकेश यादव कई साल पहले पुणे में अपने बहनोई और साले के साथ रहते थे। वहां वह एक सर्राफा कारोबारी के घर काम करते थे। कोविड महामारी के दौरान गांव लौटने के बाद उन्होंने संपत्ति और कारोबार में निवेश करना शुरू किया। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने 22 बीघा जमीन खरीदी, जिसकी कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक थी। इसके अलावा करीब एक करोड़ रुपये की लागत से मकान बनवाया और दो ट्रैक्टर, डीजे तथा पिकअप वाहन खरीदे। बाद में गांव में सीमेंट और सरिया का कारोबार भी शुरू किया। फिलहाल, मकान से मिली नकदी को लेकर पुलिस की जांच जारी है।