अंकिता भंडारी हत्याकांड: एसआईटी ने फिर किया स्पष्ट, जांच में किसी वीआईपी की भूमिका के सबूत नहीं
हरिद्वार | जनवरी 4: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने एक बार फिर साफ किया है कि अब तक की जांच में किसी भी वीआईपी की संलिप्तता के ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं। हत्याकांड के बाद गठित एसआईटी के सदस्य रहे एसपी देहात हरिद्वार शेखर सुयाल ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सार्वजनिक किया। शेखर सुयाल ने बताया कि घटना के समय यह चर्चा जरूर थी कि रिजॉर्ट में किसी कथित वीआईपी के आने की बात सामने आई थी, लेकिन उस व्यक्ति के खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं मिले। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में मामला पूरी तरह से एक ब्लाइंड केस था और इसकी शुरुआत अंकिता की गुमशुदगी से हुई थी। हालांकि, एसआईटी के गठन के बाद जांच में तेजी आई और पहले पांच घंटों के भीतर ही तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। एसपी सुयाल के अनुसार, अंकिता और उसके मित्र के बीच हुई चैट में वीआईपी का जिक्र होने के कारण इस एंगल से गहन जांच की गई। अंकिता के मित्र पुष्प के बयान दर्ज किए गए, रिजॉर्ट स्टाफ, दोस्तों और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच की गई। इसी आधार पर एक स्केच तैयार कराया गया, जिसकी पहचान नोएडा निवासी धर्मेंद्र उर्फ प्रधान के रूप में हुई। जांच में सामने आया कि धर्मेंद्र घटना से पहले रिजॉर्ट में आया था और अंकिता के मित्र ने उसकी पहचान भी की थी। इसके बाद एसआईटी ने धर्मेंद्र को जांच में शामिल किया और उसकी रिजॉर्ट में मौजूदगी, गतिविधियों और आने के उद्देश्य की हर स्तर पर पड़ताल की गई। जांच में यह पाया गया कि वह व्यक्ति जमीन खरीदने के सिलसिले में क्षेत्र में आया था और एक स्थानीय परिचित उसे खाना खिलाने के लिए रिजॉर्ट ले गया था। एसआईटी को उसके खिलाफ किसी भी प्रकार का आपराधिक सबूत नहीं मिला। शेखर सुयाल ने यह भी स्पष्ट किया कि सजा काट रहे तीनों दोषियों ने यह स्वीकार किया है कि उन्होंने अंकिता पर एक्स्ट्रा सर्विस देने का दबाव बनाया था। इस बीच, एक्ट्रेस उर्मिला सनावर द्वारा फेसबुक लाइव और ऑडियो रिकॉर्डिंग के जरिए लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अलग एसआईटी गठित की गई है। उर्मिला को नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है। उन्होंने ऑनलाइन पुलिस सुरक्षा की मांग की है, हालांकि उनका कोई स्पष्ट पता अब तक सामने नहीं आया है। एसआईटी इस पहलू की भी विस्तृत जांच कर रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड: एसआईटी का दावा, जांच में किसी वीआईपी की संलिप्तता के सबूत नहीं अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में किसी भी वीआईपी की भूमिका सामने नहीं आई है। हत्याकांड के बाद बनी एसआईटी के सदस्य और तत्कालीन एसपी देहात हरिद्वार शेखर सुयाल ने शनिवार को पत्रकार वार्ता कर जांच से जुड़े अहम तथ्य साझा किए। शेखर सुयाल ने बताया कि घटना के समय यह चर्चा जरूर थी कि रिजॉर्ट में किसी कथित वीआईपी के आने की बात सामने आई थी और अंकिता पर विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था। अंकिता के इनकार के बाद उसकी हत्या कर दी गई—ऐसी आशंकाएं शुरुआती दौर में जताई जा रही थीं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि जांच के दौरान किसी भी वीआईपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं मिले। उन्होंने बताया कि मामला शुरुआत में पूरी तरह ब्लाइंड केस था और इसकी शुरुआत अंकिता की गुमशुदगी से हुई थी। एसआईटी के गठन के बाद जांच तेज हुई और पहले पांच घंटों के भीतर ही तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। अंकिता और उसके मित्र के बीच हुई चैट में वीआईपी का जिक्र होने के कारण इस एंगल से भी गहन जांच की गई। एसआईटी ने अंकिता के मित्र पुष्प के बयान दर्ज किए, रिजॉर्ट स्टाफ से पूछताछ की और उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच की। इसी आधार पर एक स्केच तैयार कराया गया, जिसकी पहचान नोएडा निवासी धर्मेंद्र उर्फ प्रधान के रूप में हुई। जांच में यह भी सामने आया कि घटना से पहले धर्मेंद्र रिजॉर्ट में आया था और अंकिता के मित्र ने उसकी पहचान की थी। धर्मेंद्र को जांच में शामिल कर उसकी रिजॉर्ट में आवाजाही, गतिविधियों और आने के उद्देश्य की विस्तृत पड़ताल की गई। एसआईटी की जांच में सामने आया कि वह जमीन खरीदने के सिलसिले में क्षेत्र में आया था और एक स्थानीय व्यक्ति उसे खाना खिलाने के लिए रिजॉर्ट ले गया था। उसके खिलाफ कोई आपराधिक सबूत नहीं मिले। सुयाल ने यह भी बताया कि सजा काट रहे तीनों दोषियों ने अंकिता पर एक्स्ट्रा सर्विस देने का दबाव बनाने की बात स्वीकार की है। वहीं, एक्ट्रेस उर्मिला सनावर द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों की जांच के लिए अलग से एसआईटी गठित की गई है। उन्हें नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने को कहा गया है, हालांकि उनका पता अभी स्पष्ट नहीं है।