अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता संग्राम: उपाध्यक्ष चुनाव में शिंदे गुट ने पलटा सियासी गणित

By Tatkaal Khabar / 13-01-2026 07:10:53 am | 525 Views | 0 Comments
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अंबरनाथ (ठाणे), 13 जनवरी 2026 महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद सोमवार को एक बार फिर तीखे राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गई, जब उपाध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षदों के बीच नोकझोंक, नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप इतने बढ़ गए कि सामान्य सभा की गरिमा पर ही सवाल खड़े हो गए। अंबरनाथ नगर परिषद में लंबे समय से भाजपा और शिंदे गुट के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है। बीते महीने अध्यक्ष पद पर भाजपा की तेजश्री करंजुले पाटील की जीत के बाद पार्टी की स्थिति मजबूत मानी जा रही थी। हालांकि, उपाध्यक्ष पद का चुनाव शुरू होते ही सियासी समीकरण तेजी से बदल गए और भाजपा की रणनीति को बड़ा झटका लगा। 60 सदस्यीय परिषद में पहले भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ बनाकर बहुमत हासिल किया था। लेकिन कांग्रेस द्वारा पार्टी लाइन के खिलाफ समर्थन देने वाले अपने 12 पार्षदों को निलंबित किए जाने और एनसीपी के चारों पार्षदों के समर्थन वापस लेकर शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने के बाद पूरी तस्वीर बदल गई। इस उलटफेर से शिंदे गुट की संख्या बढ़कर 32 हो गई और उसे स्पष्ट बहुमत मिल गया। सोमवार को उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने उम्मीदवार प्रदीप पाटील के समर्थन में व्हिप जारी किया, लेकिन एनसीपी ने इसे मानने से इनकार कर दिया। शिवसेना (शिंदे गुट) ने एनसीपी के सदाशिव पाटील को उम्मीदवार घोषित कर भाजपा को और असहज कर दिया। जैसे ही मतदान प्रक्रिया आगे बढ़ी, सदन में माहौल बिगड़ गया और बहस गाली-गलौज व चप्पल लहराने तक पहुंच गई। हालांकि चुनाव परिणाम की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन यह साफ है कि अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता को लेकर राजनीतिक तनाव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। अंबरनाथ नगर परिषद में सियासी तूफान: उपाध्यक्ष चुनाव ने बदले सत्ता के समीकरण अंबरनाथ (ठाणे) में नगर परिषद की सामान्य सभा उस समय विवाद का केंद्र बन गई, जब उपाध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) आमने-सामने आ गए। सदन में तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे ने चुनावी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर दिए। पिछले महीने अध्यक्ष पद पर भाजपा की जीत के बाद पार्टी खुद को मजबूत स्थिति में मान रही थी, लेकिन उपाध्यक्ष चुनाव ने पूरी तस्वीर पलट दी। लंबे समय से चल रही भाजपा-शिंदे गुट की राजनीतिक खींचतान इस चुनाव में खुलकर सामने आ गई, जहां सत्ता संतुलन तेजी से बदलता दिखा। 60 सदस्यीय परिषद में कांग्रेस द्वारा अपने पार्षदों को निलंबित किए जाने और एनसीपी के भाजपा से समर्थन वापस लेकर शिंदे गुट में शामिल होने से शिवसेना की ताकत बढ़कर स्पष्ट बहुमत तक पहुंच गई। इस सियासी उलटफेर ने भाजपा की रणनीति को बड़ा झटका दिया। चुनाव प्रक्रिया के दौरान व्हिप को लेकर विवाद, उम्मीदवार चयन और खुले टकराव ने साफ कर दिया कि अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। आधिकारिक परिणाम चाहे जो हों, आने वाले दिनों में राजनीतिक संघर्ष और तेज होने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।