मकर संक्रांति 2026: कड़ाके की ठंड में हरिद्वार में श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी
हरिद्वार, 14 जनवरी 2026: कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद इस साल मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। हर की पैड़ी और अन्य घाटों पर लोगों ने गंगा में आस्था के साथ डुबकी लगाई और भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। ढोल और दमाऊं की थाप के बीच देव डोलियों के साथ विशेष पूजा और स्नान का आयोजन किया गया। इस वर्ष मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है, जो करीब 23 साल बाद एक ही दिन पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्य आचार्य विकास जोशी के अनुसार, इस विशेष मुहूर्त में स्नान, दान और पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर हुआ और उत्तरायण काल की शुरुआत के साथ यह दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर सुबह 7 बजकर 31 मिनट से रात 3 बजकर 4 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बना रहा। इसके साथ ही चतुर्ग्रही योग और वृद्धि योग भी बन रहे हैं, जिससे यह दिन और अधिक शुभ माना गया। श्रद्धालु इस दिन गंगा में स्नान करने के बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा कर सूर्य देव को जल अर्पित कर रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार इस दिन तिल और गुड़ का दान, जरूरतमंदों को कंबल, वस्त्र या अनाज दान करना, और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना विशेष लाभकारी होता है। इस शुभ मुहूर्त पर किया गया हर कर्म अनंत गुना फलदायी माना जाता है, जिससे श्रद्धालुओं का उत्साह ठंड के बावजूद बना रहा। मकर संक्रांति 2026: कड़ाके की ठंड में हरिद्वार में श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में आस्था की डुबकी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद इस साल मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आई। हर की पैड़ी और अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था के साथ डुबकी लगाई और भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। ढोल और दमाऊं की थाप के बीच देव डोलियों के साथ विशेष पूजन और स्नान का आयोजन हुआ। इस वर्ष मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है, जो करीब 23 साल बाद एक ही दिन पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्य आचार्य विकास जोशी के अनुसार, इस विशेष मुहूर्त में स्नान, दान और पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर हुआ और उत्तरायण काल की शुरुआत के साथ यह दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर सुबह 7 बजकर 31 मिनट से रात 3 बजकर 4 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बना रहा। इसके साथ ही चतुर्ग्रही योग और वृद्धि योग भी बन रहे हैं, जिससे यह दिन और अधिक शुभ माना गया। श्रद्धालु इस दिन गंगा में स्नान करने के बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा कर सूर्य देव को जल अर्पित कर रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार इस दिन तिल और गुड़ का दान, जरूरतमंदों को कंबल, वस्त्र या अनाज दान करना, और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना विशेष लाभकारी होता है। इस शुभ मुहूर्त पर किया गया हर कर्म अनंत गुना फलदायी माना जाता है, जिससे श्रद्धालुओं का उत्साह ठंड के बावजूद बढ़ा रहा।