मौनी अमावस्या पर प्रयागराज महाकुंभ में श्रद्धालुओं का सैलाब, 3.5 करोड़ स्नानार्थियों की उम्मीद; प्रशासन पूरी तरह तैयार
प्रयागराज | 17 जनवरी 2026 प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन स्नान को लेकर भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। अनुमान है कि इस दिन करीब साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इस विशाल संख्या को देखते हुए मेला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और स्नान व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। संगम क्षेत्र पर दबाव कम करने के लिए एक अतिरिक्त स्नान घाट ‘काली पार्ट-दो’ का विस्तार किया गया है। प्रशासन ने लखनऊ और अयोध्या की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नागवासुकि क्षेत्र में ही स्नान की विशेष व्यवस्था की है, ताकि संगम नोज पर अत्यधिक भीड़ न जुटे। शुक्रवार तड़के से ही स्नान का क्रम शुरू हो गया था। संगम नोज के साथ-साथ नैनी के अरैल घाट, झूंसी और अन्य प्रमुख स्नान घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। एक अनुमान के मुताबिक शुक्रवार को 15 से 20 लाख लोगों ने स्नान किया, जबकि देर शाम तक 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी दर्ज की गई। मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि पूरे मेला क्षेत्र को नौ सर्किल में बांटा गया है। भीड़ नियंत्रण के लिए 16 होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं और करीब 250 हेक्टेयर में पार्किंग की व्यवस्था की गई है। प्रमुख स्नान पर्व को ध्यान में रखते हुए यातायात डायवर्जन, एआई आधारित निगरानी, जल यातायात योजना, रेडियो संचार, आपदा प्रबंधन, अग्निशमन और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। इस बार मौनी अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है। गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या ज्योतिष पीठम के अनुसार, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। अमावस्या तिथि 17 जनवरी की रात 11:53 बजे से शुरू होकर 18 जनवरी की रात 1:09 बजे तक रहेगी। इस दौरान किया गया स्नान, जप, ध्यान और व्रत अत्यंत फलदायी माना जा रहा है, इसी कारण देश-विदेश से श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। [17/01, 10:56] Rimpa♥️: मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में आस्था का महासंगम, 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की तैयारी प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या को लेकर जबरदस्त उत्साह है। प्रशासन के अनुमान के अनुसार इस पावन दिन पर करीब साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान करेंगे। भारी भीड़ को देखते हुए मेला प्रशासन ने सुरक्षा, स्नान घाटों और यातायात से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। संगम क्षेत्र पर दबाव कम करने के लिए एक अतिरिक्त स्नान घाट भी विकसित किया गया है। लखनऊ और अयोध्या की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नागवासुकि क्षेत्र में अलग स्नान व्यवस्था की गई है। शुक्रवार तड़के से ही संगम नोज, अरैल, झूंसी और अन्य प्रमुख घाटों पर स्नान शुरू हो गया। अनुमान है कि एक ही दिन में 25 से 30 लाख श्रद्धालु मेला क्षेत्र में पहुंचे, जिनमें बड़ी संख्या में कल्पवासी भी शामिल हैं। भीड़ नियंत्रण के लिए पूरे मेला क्षेत्र को नौ सर्किल में बांटा गया है। 16 होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं और लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में पार्किंग की सुविधा दी गई है। इसके साथ ही यातायात व्यवस्था, एआई आधारित निगरानी, जल यातायात, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को और मजबूत किया गया है ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। इस बार मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन स्नान, जप और ध्यान विशेष फल देने वाला माना जाता है। यही वजह है कि देश-विदेश से श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है।