चारधाम यात्रा 2026 में सुरक्षा की नई पहल, केदारनाथ-बदरीनाथ में पहली बार एटीसी प्रणाली
देहरादून | 20 फरवरी 2026 आगामी चारधाम यात्रा 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा तकनीकी कदम उठाया जा रहा है। पहली बार केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में हवाई यातायात नियंत्रण यानी एटीसी प्रणाली स्थापित की जाएगी। इससे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर सेवाओं को मौसम की पल-पल की सटीक जानकारी मिल सकेगी और उड़ानों को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और हेमकुंड साहिब जैसे धाम ऊंचाई वाले इलाकों में स्थित हैं, जहां मौसम अचानक बदल जाता है। घाटियों में धुंध और बारिश के कारण कई बार हेलिकॉप्टर उड़ानों में बाधा आती है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। पिछले वर्ष केदारनाथ और उत्तरकाशी में हुए हेलिकॉप्टर हादसों में 13 लोगों की जान जाने के बाद सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की जरूरत महसूस की गई थी। इसी के तहत डीजीसीए और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने पहले सिरसी और सहस्त्रधारा हेलिपैड पर एटीएस प्रणाली लगाई थी। अब यात्रा शुरू होने से पहले केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में एटीसी सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके साथ ही हेलिकॉप्टरों की लाइव ट्रैकिंग के जरिए उड़ानों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि किसी भी जोखिम को समय रहते टाला जा सके। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के सीईओ आशीष चौहान के अनुसार, राज्य में सुरक्षित हेली सेवाओं के लिए पूरी तरह मजबूत व्यवस्था तैयार की जा रही है। केदारनाथ हेली सेवा के लिए 25 फरवरी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। एटीसी सिस्टम से मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी और यदि हालात खराब होंगे तो हेलिकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। चारधाम यात्रा 2026 में सुरक्षा की नई पहल, केदारनाथ-बदरीनाथ में पहली बार एटीसी प्रणाली आगामी चारधाम यात्रा 2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा तकनीकी कदम उठाया जा रहा है। पहली बार केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में हवाई यातायात नियंत्रण यानी एटीसी प्रणाली स्थापित की जाएगी। इससे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर सेवाओं को मौसम की पल-पल की सटीक जानकारी मिल सकेगी और उड़ानों को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और हेमकुंड साहिब जैसे धाम ऊंचाई वाले इलाकों में स्थित हैं, जहां मौसम अचानक बदल जाता है। घाटियों में धुंध और बारिश के कारण कई बार हेलिकॉप्टर उड़ानों में बाधा आती है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। पिछले वर्ष केदारनाथ और उत्तरकाशी में हुए हेलिकॉप्टर हादसों में 13 लोगों की जान जाने के बाद सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की जरूरत महसूस की गई थी। इसी के तहत डीजीसीए और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण ने पहले सिरसी और सहस्त्रधारा हेलिपैड पर एटीएस प्रणाली लगाई थी। अब यात्रा शुरू होने से पहले केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में एटीसी सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके साथ ही हेलिकॉप्टरों की लाइव ट्रैकिंग के जरिए उड़ानों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि किसी भी जोखिम को समय रहते टाला जा सके। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के सीईओ आशीष चौहान के अनुसार, राज्य में सुरक्षित हेली सेवाओं के लिए पूरी तरह मजबूत व्यवस्था तैयार की जा रही है। केदारनाथ हेली सेवा के लिए 25 फरवरी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। एटीसी सिस्टम से मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी और यदि हालात खराब होंगे तो हेलिकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।