एआई कंटेंट पर सख्ती: आज से लागू हुए नए नियम, ‘AI Generated’ लेबल जरूरी

By Tatkaal Khabar / 20-02-2026 01:11:55 am | 76 Views | 0 Comments
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नई दिल्ली | 20 फरवरी 2026 केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार डिजिटल कंटेंट को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। 20 फरवरी 2026 से प्रभावी इन दिशानिर्देशों के तहत अब एआई से बने हर फोटो, वीडियो और ऑडियो पर साफ तौर पर ‘AI Generated’ जैसा लेबल लगाना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इसका मकसद इंटरनेट को ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और पारदर्शी बनाना है, ताकि लोग असली और फर्जी कंटेंट के बीच फर्क समझ सकें। नए नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट की शिकायत मिलने के बाद उसे सिर्फ 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी। इसके अलावा, एआई कंटेंट के मेटाडेटा में एक तरह का ‘डिजिटल डीएनए’ मौजूद रहेगा, जिसमें यह जानकारी होगी कि कंटेंट कब, कैसे और किस टूल से बनाया गया। इससे जांच एजेंसियों को जरूरत पड़ने पर असली स्रोत तक पहुंचने में आसानी होगी। इन नियमों से एक दिन पहले 19 फरवरी को हुए एआई समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डिजिटल कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाने की चीजों पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी यह साफ दिखना चाहिए कि वह असली है या एआई से तैयार किया गया है। इससे गलत जानकारी और धोखाधड़ी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एआई का इस्तेमाल बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री, डीपफेक, धोखाधड़ी या किसी की पहचान की नकल के लिए करना गंभीर अपराध माना जाएगा। लेबल हटाने या मेटाडेटा से छेड़छाड़ करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, इन नियमों का लक्ष्य “ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट” बनाना है, ताकि एआई के गलत इस्तेमाल से होने वाले खतरों पर समय रहते लगाम लगाई जा सके। एआई कंटेंट पर सख्ती: आज से लागू हुए नए नियम, ‘AI Generated’ लेबल जरूरी केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार डिजिटल कंटेंट को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। 20 फरवरी 2026 से प्रभावी इन दिशानिर्देशों के तहत अब एआई से बने हर फोटो, वीडियो और ऑडियो पर साफ तौर पर ‘AI Generated’ जैसा लेबल लगाना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इसका मकसद इंटरनेट को ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और पारदर्शी बनाना है, ताकि लोग असली और फर्जी कंटेंट के बीच फर्क समझ सकें। नए नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट की शिकायत मिलने के बाद उसे सिर्फ 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी। इसके अलावा, एआई कंटेंट के मेटाडेटा में एक तरह का ‘डिजिटल डीएनए’ मौजूद रहेगा, जिसमें यह जानकारी होगी कि कंटेंट कब, कैसे और किस टूल से बनाया गया। इससे जांच एजेंसियों को जरूरत पड़ने पर असली स्रोत तक पहुंचने में आसानी होगी। इन नियमों से एक दिन पहले 19 फरवरी को हुए एआई समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डिजिटल कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाने की चीजों पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी यह साफ दिखना चाहिए कि वह असली है या एआई से तैयार किया गया है। इससे गलत जानकारी और धोखाधड़ी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एआई का इस्तेमाल बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री, डीपफेक, धोखाधड़ी या किसी की पहचान की नकल के लिए करना गंभीर अपराध माना जाएगा। लेबल हटाने या मेटाडेटा से छेड़छाड़ करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, इन नियमों का लक्ष्य “ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट” बनाना है, ताकि एआई के गलत इस्तेमाल से होने वाले खतरों पर समय रहते लगाम लगाई जा सके।