पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय का निधन, बंगाल की राजनीति में शोक
कोलकाता | 23 फरवरी 2026 पश्चिम बंगाल की राजनीति के कद्दावर नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का रविवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थे और कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती थे। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने जानकारी दी कि देर रात करीब 1.30 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। वह 71 वर्ष के थे। मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे और पार्टी के संगठन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका थी।टीएमसी में वह ममता बनर्जी के बाद सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते थे। पार्टी के केंद्र में हिस्सेदार बनने पर उन्हें रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2006 में वह राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009 से 2012 तक राज्यसभा में पार्टी के नेता रहे। अपनी रणनीतिक समझ के कारण उन्हें अक्सर बंगाल की राजनीति का “चाणक्य” कहा जाता था। 2010 के दशक में पार्टी से उनके संबंधों में खटास आई, खासकर शारदा चिटफंड घोटाले के बाद। फरवरी 2015 में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटाया गया और सितंबर 2017 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा और जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करने में भूमिका निभाई। उनके भाजपा कार्यकाल के दौरान 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बंगाल में 18 सीटें जीतीं। साल 2021 में मुकुल रॉय कृष्णानगर उत्तर सीट से विधायक चुने गए, हालांकि कुछ समय बाद वह भाजपा छोड़कर फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। वापसी के बाद वह सक्रिय राजनीति में कम नजर आए। उनके निधन से बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है और विभिन्न राजनीतिक दलों व नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए शोक व्यक्त किया पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय का निधन, बंगाल की राजनीति में शोक पश्चिम बंगाल की राजनीति के कद्दावर नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का रविवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थे और कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती थे। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने जानकारी दी कि देर रात करीब 1.30 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। वह 71 वर्ष के थे। मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे और पार्टी के संगठन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका थी।टीएमसी में वह ममता बनर्जी के बाद सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते थे। पार्टी के केंद्र में हिस्सेदार बनने पर उन्हें रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2006 में वह राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009 से 2012 तक राज्यसभा में पार्टी के नेता रहे। अपनी रणनीतिक समझ के कारण उन्हें अक्सर बंगाल की राजनीति का “चाणक्य” कहा जाता था। 2010 के दशक में पार्टी से उनके संबंधों में खटास आई, खासकर शारदा चिटफंड घोटाले के बाद। फरवरी 2015 में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटाया गया और सितंबर 2017 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा और जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करने में भूमिका निभाई। उनके भाजपा कार्यकाल के दौरान 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बंगाल में 18 सीटें जीतीं। साल 2021 में मुकुल रॉय कृष्णानगर उत्तर सीट से विधायक चुने गए, हालांकि कुछ समय बाद वह भाजपा छोड़कर फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। वापसी के बाद वह सक्रिय राजनीति में कम नजर आए। उनके निधन से बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है और विभिन्न राजनीतिक दलों व नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए शोक व्यक्त किया है।