प्रयागराज: गिरफ्तारी से बचाव के लिए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
प्रयागराज | 25 फरवरी 2026 प्रयागराज में नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों से जुड़े मामले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों की ओर से अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि गिरफ्तारी पर रोक लग सके। मंगलवार को शंकराचार्य की ओर से अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्रीप्रकाश ने अग्रिम जमानत याचिका की प्रति शासकीय अधिवक्ता कार्यालय में सौंप दी है। इसके बाद याचिका को हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल किया जाएगा। आवश्यक रिपोर्टिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह मामला अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाना में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें पॉक्सो एक्ट के तहत शंकराचार्य के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर एक नाबालिगों के संरक्षक के रूप में सामने आए व्यक्ति की ओर से दर्ज कराई गई है, जिसमें शंकराचार्य और उनके शिष्य का नाम शामिल है। अग्रिम जमानत याचिका में यह तर्क दिया गया है कि शंकराचार्य पूरी तरह निर्दोष हैं और उनके खिलाफ "झूठे और घृणित मामले में फंसाने का षड्यंत्र" रचा गया है। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दुर्भावना के चलते उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि वह पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं और इसलिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जानी चाहिए। प्रयागराज: गिरफ्तारी से बचाव के लिए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा प्रयागराज में नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों से जुड़े मामले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों की ओर से अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि गिरफ्तारी पर रोक लग सके। मंगलवार को शंकराचार्य की ओर से अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्रीप्रकाश ने अग्रिम जमानत याचिका की प्रति शासकीय अधिवक्ता कार्यालय में सौंप दी है। इसके बाद याचिका को हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल किया जाएगा। आवश्यक रिपोर्टिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह मामला अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाना में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें पॉक्सो एक्ट के तहत शंकराचार्य के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर एक नाबालिगों के संरक्षक के रूप में सामने आए व्यक्ति की ओर से दर्ज कराई गई है, जिसमें शंकराचार्य और उनके शिष्य का नाम शामिल है। अग्रिम जमानत याचिका में यह तर्क दिया गया है कि शंकराचार्य पूरी तरह निर्दोष हैं और उनके खिलाफ "झूठे और घृणित मामले में फंसाने का षड्यंत्र" रचा गया है। याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दुर्भावना के चलते उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि वह पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं और इसलिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जानी चाहिए।