रामपुर की सेशन कोर्ट से आजम खान को लगा बड़ा झटका, नहीं मिली राहत
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला खान की लगातार मुसीबतें बढ़ती हुई नजर आ रही है . सोमवार को रामपुर के सेशन कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भी आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को राहत नही मिली. आजम खान और उनके बेटे अब्दुला आजम खान ने जो याचिका अपनी सजा में राहत पाने के लिए रामपुर के सेशन कोर्ट में दी थी वो खारिज हो गई है और सजा को बरकार रखा गया है.
आपको बता दे कि रामपुर से जुड़े पैन कार्ड और पासपोर्ट मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को एक बार फिर बड़ा कानूनी झटका लगा है. सेशन कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 7 साल की सजा को बरकरार रखा है. यह फैसला उस अपील पर आया है, जो एमपी-एमएलए विशेष अदालत के पिछले निर्णय के खिलाफ दाखिल की गई थी. लंबे समय से चल रहे इस मामले पर आज आए फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी दोनों ही हलकों में चर्चा तेज हो गई है.
हालांकि यह पूरा मामला उस शिकायत से जुड़ा है, जो भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने दर्ज कराई थी. आरोप था कि दस्तावेजों में गड़बड़ी और गलत जानकारी के आधार पर पैन कार्ड और पासपोर्ट से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया गया है. अदालत ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं, लेकिन अंततः निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए सजा को बरकरार रखा. साथ ही आजम खान की ओर से दाखिल किए गए दोनों प्रार्थना पत्र भी कोर्ट ने खारिज कर दिए. इस निर्णय के बाद कानूनी लड़ाई अब एक नए चरण में पहुंच गई है.
वही फिलहाल इस फैसले के बाद आजम खान और अब्दुल्ला आजम के पास केवल हाईकोर्ट में अपील करने का ही विकल्प बचा है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अब आगे की लड़ाई उच्च न्यायालय में तय होगी, जहां इस पूरे मामले की फिर से गहराई से समीक्षा हो सकती है. लेकिन मौजूदा स्थिति में सेशन कोर्ट का यह निर्णय उनके लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि निचली अदालत का फैसला अब तक कायम है.
दरअसल इसी बीच इस मामले में एक नया मोड़ भी सामने आया है. पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने इस केस में पक्षकार बनने की मांग की है. उनका कहना है कि उन्हें भी इस मामले में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए. हाईकोर्ट के निर्देश के बाद स्थानीय अदालत को उन्हें सुनवाई का मौका देने के आदेश दिए गए हैं. सूत्रों के अनुसार, नवेद मियां को पक्षकार बनाए जाने और आगे की प्रक्रिया को लेकर अगली तारीख जल्द तय की जा सकती है.
कुल मिलाकर, यह मामला अब सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का भी विषय बन गया है. एक तरफ अदालत का फैसला है, तो दूसरी तरफ अपील और नए पक्षकारों के जुड़ने से यह केस आगे और जटिल होता दिख रहा है.