सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने का किया ऐलान, सरकार को लिखी चिट्ठी में रखीं शर्तें
जलवायु और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट आश्वासन नहीं देती, तब तक वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त नहीं करेंगे। 22 जुलाई 2026 को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने छात्रों, शिक्षा व्यवस्था और आंदोलन में शामिल युवाओं से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए हैं। वांगचुक ने पत्र में केंद्रीय मंत्रियों का अस्पताल आकर मुलाकात करने और बातचीत के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा कि चर्चा के दौरान सरकार ने परीक्षा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और संसद में इस पूरे मामले पर सार्थक चर्चा कराने का भरोसा दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दों पर भी विचार करने की बात कही गई। सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में कहा कि 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च शांतिपूर्ण रहा, लेकिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया ने युवाओं के लोकतांत्रिक विरोध को देखा है और अब सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई न हो।
उन्होंने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की अपील की है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह तभी अनशन खत्म करेंगे जब सरकार आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करने का स्पष्ट और लिखित आश्वासन देगी।
वांगचुक ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा आश्वासन नहीं मिलता है तो वह अपना अनशन अनिश्चितकाल तक जारी रखने के लिए मजबूर होंगे। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि आंदोलन को दबाने के लिए भविष्य में पुलिस बल का अत्यधिक इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
पत्र के अंत में सोनम वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र की असली पहचान इस बात से होती है कि वह अपने साहसपूर्वक आवाज उठाने वाले युवाओं के साथ कैसा व्यवहार करता है। उन्होंने सरकार से छात्रों की आवाज़ सुनने और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।