बीएमसी चुनाव 2026: आज तय होगा मुंबई की सत्ता का भविष्य, ठाकरे ब्रांड की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा
मुंबई | 15 जनवरी 2026 देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के लिए आज मतदान हो रहा है। मुंबई के साथ-साथ महाराष्ट्र की कुल 29 महानगरपालिकाओं में वोट डाले जा रहे हैं। करीब 74 हजार करोड़ रुपये के विशाल बजट वाली बीएमसी का चुनाव केवल एक स्थानीय निकाय का नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता और महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला माना जा रहा है। बीएमसी चुनाव की अहमियत इसकी आर्थिक और प्रशासनिक ताकत के कारण कहीं ज्यादा है। सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी इसी संस्था के पास होती है। कुछ साल पहले तक बीएमसी का बजट दिल्ली सरकार से भी अधिक रहा है। यही वजह है कि जिस दल का बीएमसी पर कब्जा होता है, उसकी राजनीतिक पकड़ पूरे राज्य में मजबूत मानी जाती है। इस बार यह चुनाव 2024 के लोकसभा और आने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है। इस चुनाव में कुल 29 महानगरपालिकाओं के लिए 15,931 उम्मीदवार मैदान में हैं। बीएमसी में जीत दर्ज करने के लिए सभी प्रमुख दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुंबई में शहरी मतदाता किस राजनीतिक धारा के साथ खड़ा है, इसका साफ संकेत इन नतीजों से मिलेगा। बीएमसी चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा ठाकरे बंधुओं के गठबंधन की हो रही है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे पहली बार साथ मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि यह गठबंधन मराठी वोटों के बंटवारे को रोकने की रणनीति का हिस्सा है। अविभाजित शिवसेना ने 25 वर्षों तक बीएमसी पर शासन किया था, लेकिन पार्टी विभाजन के बाद यह पहला मौका है जब ठाकरे ब्रांड की असली ताकत की परीक्षा हो रही है। मुख्य मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति और ठाकरे बंधुओं के गठबंधन के बीच माना जा रहा है। भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इस बार रणनीतिक रूप से अजित पवार की एनसीपी को महायुति से बाहर रखा है, ताकि गैर-हिंदू मतदाताओं को साधा जा सके। वहीं महाविकास आघाड़ी में शामिल कांग्रेस ने मुंबई में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीएमसी के नतीजे केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेंगे। अगर ठाकरे बंधुओं का गठबंधन मजबूत प्रदर्शन करता है, तो इसे ठाकरे ब्रांड की वापसी के रूप में देखा जाएगा। वहीं, महायुति की जीत भाजपा और उसके सहयोगियों की महाराष्ट्र में मजबूत होती पकड़ का संकेत होगी। कुल मिलाकर, आज का मतदान मुंबई की राजनीति के भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता बीएमसी चुनाव 2026: आज तय होगी मुंबई की सत्ता, ठाकरे ब्रांड और महायुति आमने-सामने देश की सबसे समृद्ध महानगरपालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के लिए आज मतदान हो रहा है। 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक बजट वाली बीएमसी का चुनाव सिर्फ स्थानीय निकाय तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे मुंबई की सत्ता और महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला बड़ा मुकाबला माना जा रहा है। इसी के साथ राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में भी वोट डाले जा रहे हैं। बीएमसी चुनाव की अहमियत इसकी जबरदस्त आर्थिक और प्रशासनिक ताकत के कारण है। मुंबई जैसे महानगर में सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी बीएमसी के पास होती है। कुछ वर्ष पहले तक इसका बजट कई राज्यों से भी अधिक रहा है, इसलिए जिस दल का यहां दबदबा होता है, उसकी राजनीतिक पकड़ पूरे महाराष्ट्र में मजबूत मानी जाती है। यही कारण है कि इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है। इस बार चुनावी मैदान में कुल 15,931 उम्मीदवार हैं और सभी प्रमुख दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। खासतौर पर ठाकरे बंधुओं—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—के गठबंधन पर सभी की नजरें टिकी हैं। अविभाजित शिवसेना ने 25 साल तक बीएमसी पर शासन किया था, लेकिन पार्टी टूटने के बाद यह पहला मौका है जब ठाकरे ब्रांड की वास्तविक राजनीतिक ताकत की कड़ी परीक्षा हो रही है। मुख्य मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति और ठाकरे बंधुओं के गठबंधन के बीच माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस ने मुंबई में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बीएमसी के नतीजे न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं।