बसपा सुप्रीमो मायावती ने जन्मदिन पर किया संकल्प दोहराया, कार्यकर्ताओं में भरा जोश
लखनऊ, 16 जनवरी 2026 उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में बसपा की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, लेकिन पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जोश भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने जन्मदिन के मौके पर कहा कि वह कभी झुकने वाली नहीं हैं और किसी दबाव या लालच में पार्टी के मूवमेंट से पीछे नहीं हटेंगी। मायावती ने दलितों और उपेक्षित वर्गों के सम्मान के लिए अपने जीवन को समर्पित करने का दावा करते हुए कहा कि जब तक मैं जिंदा हूं, मेरा संघर्ष जारी रहेगा। मायावती ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य ठीक होने और बसपा संस्थापक कांशीराम की एकमात्र उत्तराधिकारी होने का जिक्र किया और साफ कर दिया कि पार्टी को कमजोर करने की किसी भी साजिश का सामना वे करने में सक्षम हैं। उन्होंने पार्टी में गुटबाजी करने वाले कुछ पदाधिकारियों को भी स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी की कमान उनके मजबूत हाथों में ही रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के लोग उन्हें इस संघर्ष में निराश नहीं करेंगे। बसपा सुप्रीमो ने अपने मूल दलित वोट बैंक के साथ उन जातियों का जिक्र किया जो हाल ही में राजनीतिक चर्चाओं में रही हैं। उन्होंने सपा के पीडीए पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछड़े वर्गों और मुस्लिम समाज का आरक्षण का लाभ उनके समाज तक नहीं पहुंच पाया। मायावती ने भरोसा जताया कि दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज का वोट इस बार पहले से ज्यादा बसपा को मिलेगा और सपा का पीडीए केवल देखता रहेगा। हालांकि बसपा इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खतरे में है, राज्यसभा में पार्टी की उपस्थिति नहीं है और विधानसभा में केवल एक विधायक उमाशंकर सिंह हैं। इसके बावजूद, बसपा ने अन्य राज्यों के निकाय चुनावों में सफलता हासिल की है और प्रदेश में जनाधार बढ़ाया है। मायावती ने कई राज्यों में प्रभारी और प्रदेश अध्यक्षों को भी बदला है, ताकि पार्टी अपने वजूद को मजबूती दे सके। बसपा सुप्रीमो मायावती ने जन्मदिन पर जताया जोश, दोहराया पार्टी के प्रति अडिग संकल्प उत्तर प्रदेश की राजनीतिक लड़ाई में चुनौती के बावजूद बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह भरने का काम किया। उन्होंने कहा कि वह कभी झुकने वाली नहीं हैं और किसी दबाव या लालच में पार्टी के मूवमेंट से पीछे नहीं हटेंगी। दलित और उपेक्षित वर्गों के सम्मान के लिए उनका संघर्ष हमेशा जारी रहेगा। मायावती ने अपने स्वास्थ्य ठीक होने और बसपा संस्थापक कांशीराम की एकमात्र उत्तराधिकारी होने का जिक्र करते हुए साफ संदेश दिया कि पार्टी को कमजोर करने की साजिशों का सामना वह पूरी क्षमता से करेंगी। पार्टी में गुटबाजी करने वाले पदाधिकारियों को भी उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी की कमान उनके हाथ में सुरक्षित है। उन्होंने अपने मूल दलित वोट बैंक और अन्य जातियों का जिक्र करते हुए सपा के पीडीए पर निशाना साधा। मायावती ने भरोसा जताया कि दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज का समर्थन इस बार पहले से ज्यादा बसपा को मिलेगा और विरोधी केवल देखते रहेंगे। उनकी यह रणनीति अगले विधानसभा चुनाव में असर दिखा सकती है। हालांकि बसपा कई चुनौतियों से जूझ रही है। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खतरे में है, राज्यसभा में कोई उपस्थिति नहीं और विधानसभा में केवल एक विधायक हैं। इसके बावजूद पार्टी ने निकाय चुनावों में सफलता हासिल की और प्रदेश में जनाधार बढ़ाया है। मायावती ने कई राज्यों में प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष बदलकर पार्टी को मजबूत करने की तैयारी की है।