2030 तक हर साल 50 अंतरिक्ष लॉन्च का लक्ष्य, निजी क्षेत्र पर भारत का बड़ा दांव

By Tatkaal Khabar / 06-09-2026 03:42:14 am | 43 Views | 0 Comments
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नई दिल्ली, 06 सितंबर 2026 भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के चेयरमैन पवन के. गोयनका ने रविवार को कहा कि देश ने 2030 तक हर साल 50 अंतरिक्ष प्रक्षेपण करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी और इसरो की तकनीकी क्षमता के साथ भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। करीब पांच वर्ष पहले भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का अहम फैसला किया था। गोयनका ने एक्स पर साझा किए अपने विचारों में कहा कि इस निर्णय का उद्देश्य एक ओर इसरो को नई और उन्नत तकनीकों पर काम करने के लिए अधिक अवसर देना था, वहीं दूसरी ओर निजी उद्योगों को अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़े स्तर पर विस्तार करने का मौका देना था। उनके मुताबिक, इस फैसले के बाद देश में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। जहां 2014 में इस क्षेत्र से जुड़ा केवल एक स्टार्टअप था, वहीं अगस्त 2026 तक इनकी संख्या 440 से अधिक हो गई है और निजी कंपनियां अब रॉकेट लॉन्च तथा उपग्रह निर्माण जैसे जटिल क्षेत्रों में भी अपनी क्षमता दिखा रही हैं। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था फिलहाल करीब 9 अरब डॉलर की है और अनुमान है कि अगले एक दशक में यह 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। निजी निवेश में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2021-22 में जहां अंतरिक्ष क्षेत्र में 100.5 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ था, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 618.5 मिलियन डॉलर हो गया। गोयनका के अनुसार, अब अगली चुनौती इस क्षेत्र को बड़े पैमाने पर विस्तार देने की है। 50 लॉन्च प्रतिवर्ष के लक्ष्य के लिए सरकार और निजी उद्योगों को मिलकर अधिक रॉकेट, उपग्रह और लॉन्च क्षमता तैयार करने के साथ नई तकनीकों के विकास पर भी जोर देना होगा। भविष्य में इसरो नई तकनीकी सीमाओं को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा, जबकि निजी कंपनियां इन तकनीकों को व्यावसायिक उत्पादों और सेवाओं में बदलने की भूमिका निभाएंगी। स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सल और दिगांतारा जैसी कंपनियां लॉन्च व्हीकल, उपग्रह निर्माण, पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष तकनीक आधारित सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इसी बीच, इसरो का GSLV-F17 मिशन भी भारत की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करता है। इसके जरिए करीब 2,367 किलोग्राम वजनी EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया, जो आपदा प्रबंधन, कृषि, पर्यावरण निगरानी और रणनीतिक पर्यवेक्षण में उपयोगी होगा। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के भविष्य को लेकर गोयनका ने कहा, “भारत में निर्माण करो, भारत से लॉन्च करो और भारत से पूरी दुनिया को सेवाएं प्रदान करो।” उनका मानना है कि अंतरिक्ष उद्योग का विस्तार केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे अर्थव्यवस्था, रोजगार और तकनीकी नेतृत्व को भी नई मजबूती मिलेगी। 2030 तक हर साल 50 लॉन्च का लक्ष्य भारत को घरेलू अंतरिक्ष क्षमताओं के विस्तार के साथ वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में एक महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।