सुप्रीम कोर्ट की दो सुनवाइयों पर सवाल, जस्टिस शर्मा को लेकर वकीलों के संगठन ने उठाई आपत्ति
नई दिल्ली, 26 सितंबर 2026 सुप्रीम कोर्ट में 23 सितंबर को जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के सामने आए दो अलग-अलग मामलों को लेकर न्यायिक पारदर्शिता और संभावित हितों के टकराव पर बहस शुरू हो गई है। लॉयर्स एसोसिएशन फ़ॉर कंस्टिट्यूशन (एलएएफ़सी) ने पत्र के जरिए इन सुनवाइयों पर आपत्ति दर्ज कराई है। इनमें एक मामला चुनाव आयोग से संबंधित था, जबकि दूसरा नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम से जुड़ा था। एसोसिएशन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिका को संविधान पीठ के पास भेजने और मेधा रूपम को अंतरिम राहत देने से संबंधित आदेश वापस लेने की मांग की है। संगठन चाहता है कि दोनों मामलों पर नए सिरे से ऐसी पीठ सुनवाई करे, जिसमें जस्टिस शर्मा शामिल न हों। यह मांग उन रिपोर्टों के बाद सामने आई, जिनमें जस्टिस शर्मा के बेटे के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भारत निर्वाचन आयोग के स्थायी वकील होने की बात कही गई है। एसोसिएशन ने यह भी रेखांकित किया कि नोएडा की डीएम मेधा रूपम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। इसके साथ संगठन ने न्यायाधीशों के करीबी रिश्तेदारों और किसी मामले से जुड़े पक्ष के बीच पेशेवर संबंध होने पर उसके सार्वजनिक खुलासे के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी लाइव लॉ की खबर साझा करते हुए सवाल उठाए। उन्होंने एक्स पर लिखा, "मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के मुताबिक़, 2017 में वकालत में नामांकन कराने वाले जस्टिस शर्मा के बेटे भारत निर्वाचन आयोग के स्थायी वकील हैं. वह केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और आयकर विभाग के भी स्थायी वकील हैं. उनके छोटे बेटे ने 2020 में वकालत में नामांकन कराया था और वह मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के स्थायी वकील भी हैं. क्या जस्टिस शर्मा को निर्वाचन आयोग से जुड़े मामले और ज्ञानेश कुमार की बेटी के मामले की सुनवाई से खुद को अलग नहीं कर लेना चाहिए था?" एलएएफ़सी की आपत्ति ने दोनों मामलों से आगे बढ़कर न्यायिक प्रक्रिया में पेशेवर संबंधों के खुलासे के मुद्दे को भी सामने ला दिया है। संगठन की मांग है कि ऐसे मामलों के लिए पारदर्शी व्यवस्था तय की जाए, जिससे किसी न्यायाधीश के करीबी रिश्तेदार का संबंधित पक्ष से पेशेवर जुड़ाव होने की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो सके।