न्यूयॉर्क में भारतीय राजनयिकों की सक्रियता, तकनीक से लेकर मानवीय मदद पर जोर
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के उच्च-स्तरीय सत्र के इतर विदेश मंत्री स्तर की वार्ताओं के साथ-साथ भारतीय विदेश मंत्रालय के शीर्ष राजनयिकों ने भी वैश्विक मंच पर देश के हितों और प्रतिबद्धताओं को बेहद मजबूती से आगे बढ़ाया है। इसी सिलसिले में विदेश सचिव और मंत्रालय के वरिष्ठ सचिवों ने कई अहम द्विपक्षीय व बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट (आर्थिक मामले) जैकब हेलबर्ग और अंडर सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट (राजनीतिक मामले) एलिसन हुकर के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने उभरती टेक्नोलॉजी एवं अन्य कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हेलबर्ग के साथ हुई बैठक के बाद ‘एक्स’ पर लिखा दोनों पक्ष 'पैक्स सिलिका' पहल समेत अहम और उभरती टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग को और आगे बढ़ाने, तथा सेमीकंडक्टर और अहम खनिजों के क्षेत्र में सहयोग के ज़रिए सप्लाई-चेन को मज़बूत बनाने पर सहमत हुए। हुकर के साथ हुई बैठक के बाद जायसवाल ने पोस्ट किया उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय सहयोग के कई पहलुओं पर चर्चा की, जिनमें ऊर्जा सुरक्षा, हाल ही में लागू हुआ एसआरआईए, असैन्य परमाणु सहयोग, ‘ट्रस्ट’ और 'इंडियन ओशन स्ट्रैटेजिक वेंचर' पहल शामिल हैं। इससे पहले यूएनआरडब्ल्यूए की मंत्री-स्तरीय बैठक में विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने हिस्सा लिया और उनकी भागीदारी, फ़िलिस्तीनी लोगों के प्रति भारत की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने संयुक्त राष्ट्र में सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) की वार्षिक मंत्री-स्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने एलडीसी के साथ भारत की मज़बूत साझेदारी को फिर से दोहराया और एलडीसी की टिकाऊ और स्थायी प्रगति में मदद के लिए आसान फ़ाइनेंस, स्थानीय उत्पादन एवं रोज़गार पैदा करने में निवेश व टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा यह साझेदारी आईटीईसी प्रोग्राम, रियायती क्रेडिट, अनुदान सहायता और 'भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष' के ज़रिए मांग-आधारित विकास सहयोग में झलकती है। राजनयिक स्तर पर हुईं ये सभी बैठकें स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि भारत एक तरफ जहां अमेरिका जैसी महाशक्ति के साथ भविष्य की तकनीकों पर रणनीतिक साझेदारी को गहरा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक मंचों पर विकासशील और कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों की आवाज़ बनकर अपनी वैश्विक ज़िम्मेदारी को भी पूरी निष्ठा से निभा रहा है। (रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)