विशेष पुनरीक्षण पूरा: 13.25 करोड़ से अधिक मतदाताओं की अंतिम सूची 10 अप्रैल को होगी जारी
लखनऊ | 28 मार्च 2026 प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, नोटिस पाने वाले 3.26 करोड़ मतदाताओं के पक्ष की सुनवाई शुक्रवार तक पूरी कर ली गई है। सभी मामलों की जांच के बाद अब अंतिम मतदाता सूची को तैयार किया जा रहा है, जिसके 10 अप्रैल को जारी होने की संभावना है। अधिकारियों के मुताबिक, अक्तूबर 2025 में फ्रीज की गई मतदाता सूची में करीब 12.55 करोड़ नाम शामिल थे। इनमें से 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता थे, जिनका 2003 की सूची से मिलान नहीं हो पाया था। इन लोगों से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे। सुनवाई की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इसे घर के पास आयोजित किया गया, जिससे परिवार के सदस्य भी दस्तावेज प्रस्तुत कर सके। इसके अलावा, 2.22 करोड़ ऐसे मामलों की भी जांच की गई, जिनमें तार्किक विसंगतियां थीं, जैसे नाम या उम्र से जुड़ी त्रुटियां। इन मामलों में बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया के बाद लगभग 97 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम सूची में बने रहने की संभावना है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए 86.69 लाख आवेदन (फॉर्म-6) प्राप्त हुए हैं, जबकि नाम हटाने के लिए 3.18 लाख आवेदन (फॉर्म-7) आए हैं। इन सभी प्रक्रियाओं के आधार पर अनुमान है कि अंतिम मतदाता सूची में 13.25 करोड़ से अधिक नाम शामिल होंगे, जो आगामी चुनावों के लिए महत्वपूर्ण आधार विशेष पुनरीक्षण पूरा: 13.25 करोड़ से अधिक मतदाताओं की अंतिम सूची 10 अप्रैल को होगी जारी प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, नोटिस पाने वाले 3.26 करोड़ मतदाताओं के पक्ष की सुनवाई शुक्रवार तक पूरी कर ली गई है। सभी मामलों की जांच के बाद अब अंतिम मतदाता सूची को तैयार किया जा रहा है, जिसके 10 अप्रैल को जारी होने की संभावना है। अधिकारियों के मुताबिक, अक्तूबर 2025 में फ्रीज की गई मतदाता सूची में करीब 12.55 करोड़ नाम शामिल थे। इनमें से 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता थे, जिनका 2003 की सूची से मिलान नहीं हो पाया था। इन लोगों से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे। सुनवाई की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इसे घर के पास आयोजित किया गया, जिससे परिवार के सदस्य भी दस्तावेज प्रस्तुत कर सके। इसके अलावा, 2.22 करोड़ ऐसे मामलों की भी जांच की गई, जिनमें तार्किक विसंगतियां थीं, जैसे नाम या उम्र से जुड़ी त्रुटियां। इन मामलों में बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया के बाद लगभग 97 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम सूची में बने रहने की संभावना है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए 86.69 लाख आवेदन (फॉर्म-6) प्राप्त हुए हैं, जबकि नाम हटाने के लिए 3.18 लाख आवेदन (फॉर्म-7) आए हैं। इन सभी प्रक्रियाओं के आधार पर अनुमान है कि अंतिम मतदाता सूची में 13.25 करोड़ से अधिक नाम शामिल होंगे, जो आगामी चुनावों के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगी।