बीजिंग में विदेश सचिव की मैराथन बैठकें, संबंध सुधारने पर जोर
बीजिंग। विदेश सचिव विक्रम मिसरी चीन की महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पर हैं। पूर्व में चीन में भारत के राजदूत रह चुके मिसरी ने बीजिंग पहुंचते ही चीनी कूटनीतिक और राजनीतिक तंत्र के विभिन्न स्तरों पर व्यापक और सघन बातचीत की शुरुआत की। विदेश सचिव ने अपनी यात्रा का आगाज कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हैयान के साथ बैठक से किया। हैयान के साथ बैठक के बारे में चीन स्थित भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर लिखा उन्होंने दोनों पक्षों के लिए प्राथमिकता वाले मुद्दों को हल करने और राजनीतिक, लोगों के बीच, एकेडमिक एवं थिंक-टैंक स्तर पर आदान-प्रदान को बढ़ावा देने सहित द्विपक्षीय संबंधों के लिए नेताओं के निर्देशों को और बेहतर ढंग से लागू करने के तरीकों पर चर्चा की। इसके बाद मिसरी ने चीन की विदेश मामलों की उप मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की, जहां भारत-चीन संबंधों के संपूर्ण आयामों की समीक्षा की गई। इस संबंध में भारतीय दूतावास ने बताया उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और दोनों नेताओं के उस विज़न को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की, जिसके तहत भारत और चीन एक-दूसरे के साझेदार हैं और एक-दूसरे के लिए विकास के अवसर हैं। इसमें व्यापार और आर्थिक संबंधों, संस्कृति और लोगों के बीच आदान-प्रदान के ज़रिए आपसी फ़ायदे वाले नतीजे हासिल करना शामिल है। दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया। मिसरी ने 'चाइनीज पीपल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस' की 14वीं राष्ट्रीय समिति के उप महासचिव होंग लियांग से भी मुलाकात कर दोनों देशों के बीच राजनीतिक और जन-संबंधी (पीपल-टू-पीपल) संपर्कों को प्रगाढ़ करने पर जोर दिया। अपनी यात्रा के अगले चरण में, उन्होंने सीपीसी के 'सेंट्रल पार्टी स्कूल' (नेशनल एकेडमी ऑफ गवर्नेंस) के उपाध्यक्ष ली वेंटांग से मुलाकात की, जहां भविष्य के शैक्षणिक सहयोग और वैचारिक आदान-प्रदान पर चर्चा की गई। विदेश सचिव की यह यात्रा केवल औपचारिक बैठक तक सीमित नहीं, बल्कि इसके गहरे रणनीतिक मायने हैं। गलवान विवाद के बाद कूटनीतिक स्तर पर इतनी सघन वार्ता दोनों देशों के बीच 'ट्रस्ट डेफिसिट' (विश्वास की कमी) को पाटने का काम करेगी। इसके अलावा हाल के महीनों में कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने और वीज़ा प्रक्रियाओं को सुगम बनाने जैसे जो कदम उठाए गए हैं, यह दौरा उन्हें और गति देगा। सैन्य विस्थापन (डिसइंगेजमेंट) के बाद अब एलएसी पर दीर्घकालिक शांति और सामान्य स्थिति बहाल करना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसे इस यात्रा में प्रमुखता से उठाया गया है। (रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)