अरुणाचल भारत की एकता का अभिन्न हिस्सा: उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली, 09 सितंबर 2026 उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को अरुणाचल प्रदेश को भारत की एकता का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति से पूर्वोत्तर के विकास को नई गति मिली है। विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अब देश के विकास के प्रमुख इंजन के रूप में उभर रहा है। उन्होंने अरुणाचल को भारत की सीमाओं का ‘‘गौरवशाली प्रहरी’’ बताते हुए राज्य की प्रगति को देश के समग्र विकास से जुड़ा बताया। राधाकृष्णन ने अरुणाचल प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि और ‘‘असीम संभावनाएं’’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की विभिन्न सरकारों ने पूर्वोत्तर के विकास को प्राथमिकता दी है और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय का गठन किया था। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को ‘अष्ट लक्ष्मी’ बताना इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।’’ उपराष्ट्रपति ने बताया कि इस वर्ष के केंद्रीय बजट में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के लिए 6,800 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। उन्होंने इसे पूर्वोत्तर के विकास पर केंद्र सरकार के निरंतर ध्यान का संकेत बताया। साथ ही अरुणाचल प्रदेश की प्राकृतिक संपदा का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य का करीब 79 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है और इसकी जैव विविधता, जंगल, नदियां व पारिस्थितिक संसाधन देश की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। राधाकृष्णन ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश देश में कीवी फल का सबसे बड़ा उत्पादक बनकर उभरा है और किसानों को एक लाख से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। राज्य की आर्थिक और बुनियादी ढांचे की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘राज्य की प्रति व्यक्ति आय दोगुने से अधिक हो गई है, जबकि सड़क निर्माण की रफ्तार बढ़कर करीब 1,800 किलोमीटर प्रति वर्ष हो गई है।’’ अरुणाचल प्रदेश की रणनीतिक अहमियत के साथ उसकी प्राकृतिक संपदा, कृषि क्षमता और विकास की रफ्तार पर भी जोर रहा। उनके मुताबिक, केंद्र की नीतिगत प्राथमिकताओं और बढ़ती कनेक्टिविटी के साथ पूर्वोत्तर भारत के विकास में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।