अखिलेश यादव पर पोस्टर वार, सपा के परिवारवाद पर उठाए सवाल
लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026 उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार को लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे समेत प्रदेश के कई जिलों में ऐसे पोस्टर लगाए गए, जिनमें सपा के नेतृत्व और पार्टी की कार्यशैली पर निशाना साधा गया। पोस्टरों में लिखे नारों के जरिए परिवारवाद और कथित माफिया संबंधों को लेकर पार्टी पर सवाल उठाए गए हैं। विवादित होर्डिंग में अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ मारे जा चुके गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें लगाई गई हैं। इसके अलावा जेल में बंद सपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान को भी पोस्टर में जगह दी गई है। एक पोस्टर पर लिखा है, "सपाइयों का क्या भरोसा — चाय, समोसा, रसमलाई, सारे माफिया अपने भाई", जबकि दूसरे पर ‘दाल चावल और अचार, पार्टी मतलब एक परिवार’ का नारा लिखा गया है। ये पोस्टर अखिलेश यादव की रामपुर जिला जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद सामने आए हैं। इस मुलाकात को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगियों ने सपा की आलोचना की थी। उन्होंने पार्टी पर राजनीतिक अवसरवाद और आपराधिक तत्वों को संरक्षण देने के आरोप लगाए। हालांकि, पोस्टर किसने लगवाए हैं, इस संबंध में उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। 22 अक्टूबर को अखिलेश यादव ने कहा था कि समाजवादी पार्टी 2027 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी के लिए एकजुट है। उन्होंने दावा किया था कि राज्य में भाजपा का सफाया हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने जाति जनगणना कराने और आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग का भी समर्थन किया था। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अखिलेश यादव जहां पार्टी की एकजुटता और जाति जनगणना व आरक्षण जैसे मुद्दों पर जोर दे रहे हैं, वहीं उनके खिलाफ लगाए गए पोस्टरों के जरिए सपा के नेतृत्व, परिवारवाद और कथित आपराधिक संबंधों को लेकर निशाना साधा जा रहा है।