ब्रिक्स बाजार में जहरा पेजेश्कियन ने देखी ईरानी कला की विरासत
नई दिल्ली,12 सितंबर 2026 नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बाजार में शनिवार को सदस्य और सहयोगी देशों की विविध सांस्कृतिक विरासत देखने को मिली। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की बेटी जहरा पेजेश्कियन और उनके पति हसन मजीदी ने बाजार का दौरा कर यहां प्रदर्शित कला, शिल्प और पारंपरिक उत्पादों का अवलोकन किया। इस दौरान उनके साथ महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद थीं। दौरे के दौरान जहरा पेजेश्कियन और हसन मजीदी ने अलग-अलग स्टॉल्स पर कारीगरों और शिल्पकारों से बातचीत की। उन्होंने भारतीय पवेलियन सहित ब्रिक्स के सदस्य और सहयोगी देशों के कई पवेलियन देखे। बाजार में विभिन्न देशों की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया है। इसका उद्देश्य कारीगरों, डिजाइनरों और क्रिएटिव उद्यमों को एक साझा मंच देना है, जहां हथकरघा, टेक्सटाइल, कलाकृतियों और अन्य पारंपरिक उत्पादों के जरिए इन देशों की विविध रचनात्मकता सामने आती है। ब्रिक्स बाजार में ईरानी संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले दो स्टॉल भी लगाए गए हैं। इनमें से एक स्टॉल नादिया करीमी ने लगाया है, जहां बलोची कढ़ाई को प्रदर्शित किया गया है। स्थानीय भाषा में इसे “दोच” कहा जाता है, जिसका अर्थ सिलाई या सुई का काम है। यह पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैले बलूचिस्तान क्षेत्र की महिलाओं द्वारा की जाने वाली प्राचीन और बारीक हाथ की कढ़ाई की कला है। करीमी पारंपरिक बलोची कढ़ाई तकनीक को आधुनिक डिजाइनों के साथ जोड़ती हैं। उन्होंने हाल ही में कनाडा में ‘तारन’ नाम का एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड शुरू किया है, जिसका उद्देश्य ईरानी कला और उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है। दूसरा ईरानी स्टॉल आमनेह सेदिघी ने लगाया है, जिसमें रश्ती कढ़ाई और ईरानी सुई के काम के अन्य रूप प्रदर्शित किए गए हैं। इसमें रश्ती कढ़ाई, जिसे रश्ती-दूजी भी कहा जाता है, के साथ शीशे का काम यानी आईनेह-दूजी भी शामिल है। रश्त की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को आधुनिक रोजमर्रा की वस्तुओं, जैसे कपड़े, जूते और सैंडल में भी रूपांतरित किया गया है, जबकि इसकी पारंपरिक कलात्मक विशेषताओं को बनाए रखने का प्रयास किया गया है। इस तरह ब्रिक्स बाजार केवल अलग-अलग देशों के उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और सदियों पुरानी रचनात्मक परंपराओं को एक मंच पर लाने का प्रयास भी है। ईरानी स्टॉल्स में पारंपरिक कढ़ाई को आधुनिक प्रयोगों के साथ पेश किया जाना इस बात को दर्शाता है कि विरासत की कला किस तरह नए रूपों के जरिए व्यापक दर्शकों तक पहुंच सकती है।